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भारत-चीन सीमा: मलारी हाईवे की पहाड़ी पर पड़ी बड़ी-बड़ी दरारें, देश-दुनिया से कटा 16 गांवों का संपर्क, तस्वीरें...

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 19 Aug 2021 07:08 PM IST
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India-China border: Malari highway closed on six days and Big cracks on mountain photos
मलारी हाईवे की पहाड़ी पर पड़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला

भारत-तिब्बत (चीन) सीमा को जोड़ने वाले मलारी हाईवे पर बृहस्पतिवार को छठे दिन भी आवाजाही सुचारू नहीं हो पाई। इससे नीती घाटी के 16 गांव देश-दुनिया से कटे हुए हैं। सेना और आईटीबीपी के जवानों की आवाजाही भी बंद है। छह दिनों से क्षेत्र में बिजली और संचार सेवा भी ठप है। बृहस्पतिवार को नीती घाटी में खाद्य सामग्री लेकर जा रहा हेलीकॉप्टर खराब मौसम के कारण आधे रास्ते से लौट गया। अब शुक्रवार को हेलीकॉप्टर दोबारा रवाना होगा।



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मलारी हाईवे पर हो रहे भूस्खलन की स्थिति का जायजा लेने के लिए बीआरओ की सर्वे टीम मौके पर पहुंची। टीम ने देखा कि पहाड़ी पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हुई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि भूस्खलन लंबे समय तक जारी रह सकता है।

जोशीमठ-मलारी हाईवे पर 14 अगस्त की शाम को सुराईथोटा और तमक के बीच भूस्खलन होने से यातायात बंद हो गया था। यहां अब भी लगातार भूस्खलन जारी है। भलगांव के ग्राम प्रधान लक्ष्मण बुटोला का कहना है कि देश के सीमांत क्षेत्र को जोड़ने वाला हाईवे छह दिनों से ठप पड़ा हुआ है। सरकार को वैकल्पिक मार्ग पर ध्यान देना चाहिए। 

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मलारी हाईवे की पहाड़ी पर पड़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला

हाईवे बाधित होने से 20 ट्रेकर मलारी में फंसे हुए हैं। ग्रामीणों के साथ ट्रेकर भी हाईवे खुलने का इंतजार कर रहे हैं। ये ट्रेकर क्षेत्र में ट्रेकिंग के लिए गए थे, लेकिन 14 अगस्त को हाईवे बाधित होने के बाद से मलारी में फंसे हुए हैं। 

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मलारी हाईवे पर भूस्खलन जोन में काम करते जवान - फोटो : अमर उजाला

चमोली जिलाधिकारी, हिमांशु खुराना का कहना है कि बृहस्पतिवार को नीती घाटी से ट्रेकरों और जरूरतमंद लोगों को निचले क्षेत्रों में लाने के लिए हेलीकॉप्टर भेजा गया था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण वह आधे रास्ते से लौट आया है। अब शुक्रवार को फिर से हेलीकॉप्टर क्षेत्र में जाएगा। नीती घाटी के गांवों में राशन की अभी कोई कमी नहीं है। बीआरओ, सेना व आईटीबीपी के पास भी पर्याप्त राशन है। हाईवे को सुचारू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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मलबे से पटा मलारी हाईवे - फोटो : अमर उजाला

उधर, आपदा प्रभावित रैणी और जुवाग्वाड़ गांव के ग्रामीणों ने धौली गंगा पर पुल निर्माण की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि पुल बहने के बाद से तीन किमी की अतिरिक्त पैदल दूरी नापनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने इस संबंध में जिलाधिकारी से भेंटकर उन्हें ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी यदि शीघ्र पुल निर्माण शुरू नहीं की किया गया तो एक सितंबर से जोशीमठ तहसील प्रांगण में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।

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मलारी हाईवे पर भूस्खलन - फोटो : अमर उजाला

ग्रामीणों ने कहा कि सात फरवरी को ऋषि गंगा की बाढ़ में धौली गंगा पर बना पुल बह गया था, तब से ग्रामीणों को आवाजाही में दिक्कतें आ रही हैं। ग्रामीणों ने कहा कि आपदा के बाद शासन-प्रशासन ने शीघ्र क्षेत्र में स्टील गार्डर पुल के निर्माण का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक पुल निर्माण नहीं हुआ। ऐसे में जुवाग्वाड़ गांव के ग्रामीणों को करीब तीन किलोमीटर की अतिरिक्त पैदल दूरी तय कर गंतव्य तक जाना पड़ रहा है।

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