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इस IPS ऑफिसर ने सिर्फ इसलिए फतह किया एवरेस्ट, वजह जानकर आप भी करेंगे सैल्यूट, तस्वीरें देखिए...

Sun, 30 Dec 2018 11:52 AM IST
अलका त्यागी राकेश खंडूड़ी/अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी/अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 30 Dec 2018 11:52 AM IST
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IPS Officer Sanjay Gunjyal climbed Everest for learn Disaster management challenges
संजय गुंज्याल

एक आईपीएस ऑफिसर एवरेस्ट फतह कर लौटे तो यह हैरत की ही बात होगी। लेकिन उनका मकसद जानकर आप भी सलाम करेंगे। ‘हिमालयी राज्यों में जो लोग आपदा प्रबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं, उनके लिए यह जरूरी है कि वे प्रकृति की भाषा को समझें। प्रकृति को समझने के लिए उसके करीब जाना होगा। इसी उद्देश्य से हम एवरेस्ट तक गए।’ यह कहना है कि पुलिस महानिरीक्षक पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) संजय गुंज्याल का। 

IPS Officer Sanjay Gunjyal climbed Everest for learn Disaster management challenges
संजय गुंज्याल

उनका कहना है कि एवरेस्ट अभियान के दौरान प्रकृति से जो हमने सबक सीखे उन्होंने हमें पिछले कुछ महीनों के दौरान खोज अभियानों में बहुत मदद की। एवरेस्ट फतह करके लौटे हमारे 15 सदस्यीय दल में गजब का उत्साह है और दल के सदस्यों की मदद से अब तक हम कई सर्च ऑपरेशन को पूरा करने में कामयाब रहे हैं। एसडीआरएफ के तहत पर्वतारोहण अभियान का यह सिलसिला लगातार जारी रखा जाएगा। 2020 में महिला पर्वतारोहियों के एक दल को एवरेस्ट पर भेजने की तैयारी शुरू हो चुकी है। अभियान की शुरुआत छोटी चोटियों से की जाएगी। गुंज्याल का मानना है कि पुलिस के हर अधिकारी को कम से कम एक बार पर्वतारोहण जरूर करना चाहिए। 

IPS Officer Sanjay Gunjyal climbed Everest for learn Disaster management challenges
संजय गुंज्याल

पर्वतारोहण के दौरान जब वे न्यूनतम सुविधाओं के बीच जीवन का कुछ समय व्यतीत करेंगे तो उन परिस्थितियों के बीच कार्य करने वाले मातहतों की तकलीफें और उसकी रोजमर्रा की मजबूरी को समझ सकेंगे। तब वे आदेश करने वाले एक मशीनी अफसर नहीं होंगे, बल्कि मानवीय गुणों से युक्त ऐसे अधिकारी बनेंगे, जो मातहत के दुख दर्द के हिसाब से निर्णय लेंगे। उन्होंने एवरेस्ट अभियान से आपदा प्रबंधन के लिए मिले सबक को रेखांकित करते हुए अपने अनुभवों को अमर उजाला से साझा किया। 

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IPS Officer Sanjay Gunjyal climbed Everest for learn Disaster management challenges
संजय गुंज्याल

गुंज्याल का कहना है कि हर पहाड़ की अपनी एक विशिष्टता या विलक्षणता होती है। उस विलक्षणता के हिसाब से हर तरह की विशेषज्ञता को विकसित करना आवश्यक है। यहां हर तरह की आपदा का एक इतिहास रहा है। ऐसे में एक ऐसे संगठन की जरूरत महसूस होती रही, जिसमें हर तरह की आपदा से निपटने की क्षमता हो। 40 वर्ष की आयु के जवानों की ऐसी टीम, जो पेशेवर तरीके से आपदा के समय रिस्पांस टाइम को कम कर सके। आपदा में शुरू का एक घंटा गोल्डन आवर्स माना जाता है। ये टीम गोल्डन आवर्स के भीतर रिस्पांस करने के लिए हैं। मानसून के 36 विभिन्न स्थानों में एसडीआरएफ की टीमें स्थापित होती हैं। सामान्य दिनों में 15 से 20 स्थानों पर टीमों को रखा जाता है। 

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IPS Officer Sanjay Gunjyal climbed Everest for learn Disaster management challenges
संजय गुंज्याल

उनका मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में चलाए जाने वाले खोजी अभियान के लिए विशेषज्ञता और दक्षता आवश्यक है। अनुभव  के बगैर कोई खोजी अभियान नहीं चलाया जा सकता। इस उद्देश्य से ही हमने एक टीम तैयार की, जो पर्वतारोहण कर सके। पुलिस के ऐसे जवान तलाशे गए, जो बचपन से ही पहाड़ी जीवन शैली के अभ्यस्त रहे हैं। शुरुआत प्रदेश की छोटी-छोटी चोटियों के आरोहण से हुई और उसके बाद मेरे नेतृत्व में एक 15 सदस्यीय दल एवरेस्ट पर गया और कामयाब हुआ। 

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