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मां से जल्दी आने का वादा कर घर से निकला था शहीद बेटा, तिरंगे में लिपटकर आए सिर्फ शरीर के टुकड़े
Wed, 05 Dec 2018 08:34 AM IST
रोहित भट्ट/अमर उजाला, अल्मोड़ा
रोहित भट्ट/अमर उजाला, अल्मोड़ा
Updated Wed, 05 Dec 2018 08:34 AM IST
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शहीद सूरज
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एक हफ्ते पहले जल्द लौटने का वायदा करके ड्यूटी पर गया सूरज इस हाल में लौटेगा, मां ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। मां अंतिम समय में बेटे का चेहरा भी नहीं देख सकी। दरअसल, धमाके में सूरज के शरीर के चीथड़े उड़ गए थे और शरीर के कुछ अवशेष ही मिल सके थे, जिन्हें सेना के जवान बॉक्स में लेकर आए थे।
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शहीद सूरज
मां और बहनें बॉक्स खोलने और सूरज का चेहरा दिखाने की जिद कर रहीं थीं। उन्हें समझाना मुश्किल हो गया कि सूरज को देखना अब संभव नहीं है। पार्थिव शरीर को लेकर जब जवान घर पहुंचे तो मां सीता देवी कहने लगीं कि म्यर सूरजा तू कां ल्हे गे छै (मेरे सूरज तू कहां चला गया)। मां को उसकी मौत पर भरोसा नहीं हो रहा था।
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शहीद सूरज
चारों ओर रुदन के बीच बदहवास हालत में जब मां ने कहा कि सूरज सोया है, अभी उठ जाएगा... तो वहां मौजूद लोग आंसू नहीं रोक सके। मां के साथ सूरज की दोनों विवाहित बहनें भी बॉक्स से लिपट गईं। सूरज कुछ माह बाद अपनी छोटी बहन राधा की शादी में आने की बात कहकर गया था।
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शहीद सूरज
राधा भी बार-बार इसी बात को याद करके रो रही थी, जबकि छोटा भाई चंदन एक कमरे में अकेला बैठकर सुबक रहा था। दुख के तूफान को पिता नारायण सिंह ने किसी तरह थामा हुआ था और वह सूरज के फोटो को हाथ में लिए खुद को शांत रखने का प्रयास कर रहे थे। किसी को भरोसा नहीं हो रहा था कि एक हफ्ते पहले (25 नवंबर) को छुट्टी बिताकर घर से गया सूरज अब सदा के लिए अस्त हो गया है।
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शहीद सूरज
बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पलांवाला सेक्टर में शनिवार को एक विस्फोट के दौरान शहीद हुए आठ कुमाऊं के सूरज सिंह भाकुनी के पार्थिव शरीर का सोमवार को रामेश्वर घाट में सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जैसे ही शहीद की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव लाई गई, वहां कोहराम मच गया। सूरज के अंतिम दर्शन को पूरा गांव उमड़ आया। हर किसी की आंखों में आंसू थे।
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