युवाशक्ति को किसी भी राष्ट्र या प्रदेश का भविष्य माना जाता है। युवाशक्ति की क्षमता ही राष्ट्र की तरक्की तय करती है। उत्तराखंड में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है। यहां की युवा प्रतिभाओं ने खेल, समाजसेवा, शिक्षा से लेकर वकालत के क्षेत्र में भी नाम रोशन किया है। युवाओं का मजबूत हौसला ही था जो उन्हें पारिवारिक व भौगोलिक परिस्थिति भी डिगा नहीं सकी। उन्हें जब-जब मौका मिला, उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की है। आज ये प्रतिभाएं किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। सफलता में पहुंचने तक इनका संघर्ष आज युवाओं के लिए प्रेरणा से कम नहीं है...
Youth Day 2021 : इन युवाओं ने चुनौतियों को मात देकर बनाई नई पहचान, देश-विदेश में फहराया तिरंगा
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भौगोलिक व पारिवारिक चुनौतियों को मात दे एथलेटिक्स बनीं अंकिता
एथलेटिक्स में अंकिता ध्यानी से देश को खासी उम्मीदें हैं। अंकिता ध्यानी ने वर्ष 2018 व 2019 में दौड़ में लगातार दो बार गोल्ड मेडल जीते हैं। अब उनसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को पदक दिलाने की उम्मीद की जा रही है। इसके लिए वह कड़ी मेहनत भी कर रही हैं। अंकिता ध्यानी पौड़ी जिले की रहने वाली हैं। वह बेहद सामान्य परिवार से हैं। पौड़ी में मैदान व सुविधाओं के अभाव में अंकिता ने खेल को निखारा। काबिलियत साबित की तो उन्हें देहरादून के राजकीय महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में दाखिला मिला। इसके बाद प्रशिक्षण पाकर उन्होंने कामयाबी की दौड़ लगाई।
यूथ ओलंपिक के विजेता हैं सूरज पंवार
यूथ ओलंपिक में सूरज पंवार ने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता है। सूरज पर न सिर्फ प्रदेश को बल्कि देश को भी नाज है। अब सूरज से सीनियर इवेंट में भी मेडल की उम्मीद है। इसके अलावा मनीष रावत भी रियो ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
कमल ने कैंसर को हराकर जीता मैदान
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के स्टार बल्लेबाज कमल कन्याल ने कैंसर को हराकर जिंदगी का मैदान जीता है। इसके बाद कमल ने बीसीसीआई डॉमेस्टिक सीजन में अंडर-19 वर्ग में सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज का खिताब जीता है। उन्होंने सीनियर टीम में पदार्पण करते हुए भी शतकीय पारी खेल अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। आज कमल उत्तराखंड क्रिकेट के भविष्य के रूप में देखे जा रहे हैं।
संसाधन की तंगी झेलकर जज बनीं अलका
देहरादून की अलका ने तमाम चुनौतियों को मात देकर पीसीएस-जे में शानदार प्रदर्शन किया। अब अलका जज की बड़ी जिम्मेदारी निभाएंगी। सुद्धोवाला झाझरा निवासी अलका बेहद सामान्य परिवार में पली-बढ़ी हैं। उनके पिता एक दुकान में 8 से 10 हजार की नौकरी करते हैं। घर में भाई-बहन भी हैं, लेकिन अलका ने कड़ी मेहनत के दम पर मुकाम हासिल किया।