मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर एक अक्तूबर 1994 की रात में आंदोलनकारियों पर खाकी का जो कहर बरपा था, उसके जख्म शायद ही कभी भर पाएं। अलग राज्य की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों को पुलिस ने चुन-चुन कर निशाना बनाया था।
रामपुर तिराहा कांड: आंदोलनकारियों पर बरसा था खाकी का कहर, चुन-चुन कर मारी गई थी गोली, तस्वीरें...
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पुलिस की तरफ से 24 राउंड फायरिंग का दावा किया गया था, जिसमें सात की मौत हुई थी और 17 आंदोलनकारी जख्मी हुए थे। यानी पुलिस का एक भी निशाना चूका नहीं था। पृथक राज्य की मांग को लेकर उत्तराखंड के आंदोलनकारी 24 बसों में दिल्ली में दो अक्तूबर को प्रस्तावित रैली में भाग लेने जा रहे थे।
दौड़ा-दौड़ा कर लोगों को पीटा गया। करीब ढाई सौ लोगों को हिरासत में लिया था। इसके बाद देर रात पौने तीन बजे के बीच 42 बसों में आंदोलनकारियों के आने की खबर आई तो रामपुर तिराहे पर अवरोध खड़े कर दिए गए। उन्हें रोकने के लिए अलग से फायरिंग दस्ता भी बनाया गया।