उत्तराखंड में प्रमोशन में आरक्षण के विरोध में बृहस्पतिवार को इमरजेंसी सेवाओं वाले विभागों के जनरल-ओबीसी कर्मचारियों ने भी हड़ताल में भाग लिया। इससे जरूरी सेवाएं कुछ समय के लिए लड़खड़ा गईं। हड़ताल से ज्यादातर दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि, इस दौरान सरकारी अस्पतालों के मेडिकल ड्यूटी कर्मचारियों ने सांकेतिक रूप से हड़ताल में भाग लिया। वहीं शाम को प्रदेशभर में कर्मचारियों ने मशाल जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया।
बृहस्पतिवार को हड़ताल का 11वां दिन था। शुरुआत से अब तक हड़ताल करने वाले कर्मचारियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। कर्मचारियों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि उनके हक में फैसला नहीं हुआ तो इमरजेंसी सेवाओं के कर्मचारी भी हड़ताल पर जाने को मजबूर हो जाएंगे।
गत पांच मार्च से इमरजेंसी के कर्मचारियों को हड़ताल पर जाना था, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते कर्मचारियों ने हड़ताल नहीं की। इसके बाद कोरोना वायरस को लेकर एडवाइजरी जारी हुई तो स्वास्थ्य सेवाओं के कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सके। बृहस्पतिवार को अस्पताल के भी कुछ कर्मचारियों ने थोड़ी देर के लिए हड़ताल में भाग लिया।
मिनिस्ट्रिीयल कर्मचारी पूरे दिन हड़ताल में शामिल रहे। इसके अलावा बिजली विभाग के सभी जनरल और ओबीसी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इस दौरान कई जगहों पर बिजली सप्लाई से जुड़ी समस्याओं का भी लोगों को सामना करना पड़ा।
हड़ताल के कारण कलेक्ट्रेट परिसर के ज्यादातर अनुभाग खाली रहे। इस दौरान कुछे कर्मचारी जो अधिकारियों के कहने पर रुके थे उन्हें हड़ताल में शामिल करने का भी एसोसिएशन ने दबाव बनाने का प्रयास किया। इसके लिए हड़ताली कर्मचारियों का एक दल कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचा और प्रदर्शन करने लगा। कुछ देर बाद जब अन्य कर्मचारी वहां पहुंचे तो प्रदर्शनकारी वहां से जा सके।