शनि महाराज 26 अक्तूबर को अपनी चाल बदलकर धनु राशि में प्रवेश करेंगे। शनि की यह चाल मार्गी यानी सीधी होगी। इससे विभिन्न राशियों अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा। हालांकि शनि का मार्गी होना सभी राशियों के लिए अच्छा माना जाता है। ज्योतिषज्ञों के अनुसार जिस किसी जातक की राशि में शनि ढैया, साढ़े साती के प्रभाव में है उसे शनि उपासना और दान करना चाहिए।
धनु राशि में प्रवेश कर रहे शनिदेव, जानिए आपकी राशि पर कैसा रहेगा इसका असर
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ज्योतिषाचार्य गौरव आर्य के अनुसार शनि महाराज 26 अक्तूबर को राशि परिवर्तन करते हुए धनु में मध्याह्न 3:15 बजे प्रवेश करेंगे। शनि 20 जून को वक्री हुए थे और वक्री चाल में वृश्चिक राशि में प्रवेश किया था। अब मार्गी होकर धनु राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इसका असर सामान्य लोगों के जनजीवन पर भी पड़ता है। शाम को शनि गोचर में धनु राशि में प्रवेश करेंगे। धनु में गोचर होने के कारण विश्व में बड़े राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तन की संभावना है।
उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार शनि 26 अक्तूबर को मूल नक्षत्र धनु राशि में प्रवेश करेंगे और यहां 127 दिनों तक रहकर दो मार्च को पूर्वाषाढ़ नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। पुन: 18 अप्रैल वर्ष 2018 को शनि वक्री हो जाएंगे। पांच जून को फिर मूल नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। 6 सितंबर को शनि मार्गी होकर 27 नवंबर को फिर पूर्वाषाढ़ नक्षत्र पर मार्गी रहकर 30 अप्रैल को वक्री हो जाएंगे। करीब 141 दिनों तक पूर्वाषाढ़ नक्षत्र में वक्री रहकर 18 सितंबर वर्ष 2019 को मार्गी होंगे।
26 दिसंबर वर्ष 2019 को शनि उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और इसके बाद 24 जनवरी 2020 को मकर राशि में प्रवेश करेंगे। शनि का राशि परिवर्तन सोने, चांदी, तांबे के मिलने के रूप में देखा जाता है। ज्योतिषज्ञों के अनुसार शनि को सबसे क्रूर ग्रह माना जाता है, लेकिन इन्हें न्याय प्रिय देवता के रूप में भी पूजा जाता है।
डा. आचार्य सुशांत राज के अनुसार जो भी व्यक्ति ईमानदारी से काम करता है शनि उसे सुख-समृद्धि देते हैं, लेकिन बेइमानी के रूप में काम करने वाले के साथ शनि का व्यवहार भी कठोर होता है। शनि के कुप्रभाव को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। लोग उसे क्रूर ग्रह कहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। शनि शुभ फल भी देने वाले हैं। इसके लिए नित्य पूजा पाठ, माता-पिता की सेवा, ईमानदारी आदि की जरूरत होती है।