आज अमर उजाला आपको एक ऐसी खबर पढ़ाने जा रहा है जो देशभक्ति के अनोखे जज्बे की कहानी बयां करती हैं। अमर उजाला अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देता, लेकिन यह कहानी हर देश भक्त तक पहुंचाना जरूरी समझता है।
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सीमा पर कामचोरी करने पर थप्पड़ मारती है 'आत्मा', पढ़िए देशभक्ति की अनोखी कहानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 07 Jan 2018 10:08 AM IST
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- फोटो : google
यह कहानी है भारत मां के वीर सपूत जसवंत सिंह रावत की। जो गढ़वाल राइफल के वीर जवान रहे और इन्होंने 1962 में चीन के साथ हुई लड़ाई में चीनी सेना को रणभूमि में करारी टक्कर दी। लोगों का कहना है कि वीर जसवंत सिंह की आत्मा पोस्ट पर तैनात झपकी ले रहे सैनिकों को थप्पड़ मारकर जगाती है। इतना ही नहीं जसवंत सिंह को लेकर कई तरह की कहानियां कहीं जाती हैं।
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कहा जाता है कि जिस कमरे में जसवंत रहते थे वहां आज भी उनके जूतों को पॉलिश करके रखा जाता है। उनके कपड़ों को धोकर और प्रेस करके रखा जाता है, बिस्तर भी लगाया जाता है। लोगों का कहना है कि अगली सुबह बिस्तर, जूते और कपड़े ऐसे मिलते हैं जैसे किसी ने उनका उपयोग किया हो।
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बताया जाता है कि 17 नवंबर 1962 को जब चीनी सेना ने यहां हमला किया तो गढ़वाल राइफल्स की चौथी बटालियन के ज्यादातर जवान मारे गए, लेकिन जसवंत सिंह अकेले ही 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित अपनी पोस्ट पर डटे रहे। उन्होंने दो स्थानीय मोनपा लड़कियों सेला और नूरा की मदद से अलग-अलग जगहों पर हथियार रखे और चीनी सेना पर हमला बोल दिया। जिस कारण चीनी सेना को लगा कि वे भारतीय सेना की टुकड़ी से लड़ रहे हैं न कि एक आदमी से।
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कहा जाता है कि इस भीषण लड़ाई के दौरान जसवंत सिंह ने 300 चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। लेकिन जसवंत सिंह को राशन पहुंचाने वाले आदमी के पकड़े जाने के बाद चीनी सेना को पता चला कि उनकी सेना के होश उड़ाने वाला एक अकेला राइफलमैन जसंवत सिंह है। सेला ग्रेनेड हमले में मारी गई जबकि नूरा पकड़ी गई। चीनी सैनिकों ने जसवंत सिंह को पकड़ लिया और पेड़ से लटका कर फांसी दे दी। चीनी सेना जसंवत सिंह का सिर काटकर अपने साथ चीन ले गई, लेकिन जसवंत की बहादुरी से प्रभावित एक चीनी कमांडर ने बाद में उसे भारत को लैटा दिया।