उत्तराखंड में सत्तारुढ़ कांग्रेस में मुख्यमंत्री का चेहरा बेशक खांटी सियासतदां हरीश रावत हैं, मगर उनके चुनावी रथ को विजय पथ पर ले जाने का दारोमदार अकेले उन्हीं पर नहीं हैं। ये बात जरूर है कि सियासी संकट के बाद कुछ किरदार कम हो गए हैं। कभी कांग्रेस कद्दावर नेताओं का कुनबा होता था, जिसमें से सतपाल महाराज, विजय बहुगुणा और डॉ. हरक सिंह रावत सरीखे बड़े नेता भाजपा में जा चुके हैं। मगर जो बड़े नाम बचे हैं, उनकी राय के पार्टी में खास मायने हैं।
उत्तराखंड में कांग्रेस के ये किरदार, मायने रखते हैं हर बार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंबिका सोनी: एआईसीसी की महासचिव व प्रदेश प्रभारी होने के नाते अंबिका सोनी इलेक्शन की मुख्य कड़ी हैं। पंजाब चुनाव के बावजूद कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें उत्तराखंड में तैनात रखकर भरोसा जताया है। संगठन, सरकार और आलाकमान के बीच संतुलन की धुरी अंबिका ही हैं।
संजय कपूर: पार्टी के प्रदेश सहप्रभारी संजय कपूर इस चुनाव में अहम कड़ी हैं। वह आलाकमान के प्रतिनिधि के तौर पर सांगठनिक गतिविधियों, प्रत्याशियों की चयन प्रक्रिया और प्रचार अभियान को दिशा-निर्देश दे रहे हैं।
हरीश रावत: मुख्यमंत्री का चेहरा हैं। पार्टी में एक बड़े खेमे की माने तो कांग्रेस की चुनावी वैतरणी वही पार लगा सकते हैं। किस सीट पर कौन प्रत्याशी होगा, ये तय करने में उनकी राय बेहद अहम है। चुनाव प्रचार में वह सबसे डिमांडेबल स्टार कंपेनर हैं।
किशोर उपाध्याय: पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते विस चुनाव में किशोर उपाध्याय की भूमिका सबसे अहम हैं। सीएम के बाद वही हैं, जिनके राजनीतिक भविष्य चुनावी नतीजों से तय होना हैं। संगठन में वह उतने ही ताकतवर हैं, जितने सरकार में मुख्यमंत्री।