आमतौर से सरकारी स्कूलों के शिक्षिकों को लेकर आम लोगों की शिकायत होती है कि वह स्कूल नहीं आते या फिर देर से पहुंचते हैं। आते हैं तो बच्चों को पढ़ाने को लेकर गंभीर नहीं होते। दूसरी तरफ बहादराबाद विकासखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय राजपुर की शिक्षिका रितु शर्मा बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल लगने के तय समय से एक घंटे पहले पहुंच जाती हैं।
Uttarakhand: एक महिला टीचर की कहानी, जिसने बच्चों के सपनों को उड़ान देने के लिए उठाया ये बीड़ा
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गर्मियों के समय में स्कूल जल्द खुलने के कारण वह अपने स्कूल से अतिरिक्त समय को बच्चों को नहीं दे पाई। क्योंकि उस समय स्कूल खुलने का समय सुबह साढ़े सात बजे का रहता है और इससे पहले घर से आकर अतिरिक्त क्लास लेना संभव नहीं हो सका। पर जब शरदकालीन समय परिवर्तन होने से स्कूलों के खुलने का टाइम 9:15 का हुआ तो शिक्षिका रितु ने भी अपना प्लान धरातल पर उतार दिया।वह स्कूल में बच्चों को एक्सट्रा क्लास लेने के लिए सुबह 8:15 बजे पहुंचने लगी।
सवा नौ बजे तक बच्चों को पढ़ाने के बाद रितु स्कूल में सामान्य अध्यापकों की तरह शिक्षण कार्य में जुट जाती हैं। इससे वह करीब एक माह से कक्षा दो और कक्षा चार के बच्चों को हर सुबह एक्स्ट्रा क्लास में हिंदी और गणित की अतिरिक्त शिक्षा देकर उनके सपनों को उड़ान देने के लिए लगी हुई हैं।
वह बच्चों को उनकी कक्षा के पाठ्यक्रम के अलावा अन्य सामान्य ज्ञान के बारे में भी बच्चों को बच्चों को पढ़ा रही हैं। जिसमें वह हर रोज एक्स्ट्रा क्लास में होने वाली पढ़ाई के साथ-साथ, जनरल नॉलेज, प्रकृति से जुड़ी विभिन्न जानकारियां बच्चों को दे रही हैं। जिससे बच्चे किताबी ज्ञान के साथ ही अन्य चीजों को जान और समझ सकें।
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अर्द्धवार्षिक से पहले बच्चों के टेस्ट लेने के दौरान देखा कि वह कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। जिससे बच्चों के अभिभावकों से बात की गई। अभिभावक बच्चों को स्कूल से एक घंटा पहले भेजने के लिए सहमत हुए तो अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के साथ एक्स्ट्रा कक्षाएं लेनी शुरू कर दी गई। उन्हें अर्द्धवार्षिक के तैयार किया गया। अब उनमें कुछ सुधार हो रहा है। जब तक अभिभावक अपने बच्चों को एक्स्ट्रा क्लास में भेजते रहेंगे। वह उन्हें पढ़ाती रहेंगी।
- रितु शर्मा, सहायक अध्यापक, राजपुर