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Uttarakhand: 'गोल्डन ब्वाय' लक्ष्य सेन को मिलेगा अर्जुन अवॉर्ड, राष्ट्रमंडल खेलों में हासिल की थी स्वर्णिम जीत
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 15 Nov 2022 09:34 PM IST
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राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतने के बाद लक्ष्य सेन
- फोटो : सोशल मीडिया
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उत्तराखंड के गोल्डन ब्वाय शटलर लक्ष्य सेन को प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा जाएगा। उन्होंने यह अवॉर्ड अपने दादा को समर्पित किया है। इसकी जानकारी लक्ष्य ने अपने ट्वीटर एकाउंट पर साझा की। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि 'प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं में से एक के रूप में घोषित किए जाने पर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। यह ऐसा संयोग है कि इन पुरस्कारों की घोषणा 14 नवंबर को की जाती है, ठीक उसी दिन जब मेरे प्यारे दादा स्वर्गीय श्री सी.एल. सेन 2013 में हमें छोड़कर चले गए थे। दादाजी, यह आपके लिए है '
Honoured to be announced as one of the recipients of the prestigious Arjuna Award.
It’s such a coincidence that these awards are announced on 14th Nov, exactly the date when my beloved grandfather, Late Shri CL Sen left us in 2013. Dadaji, this one’s for you ♥️ pic.twitter.com/CtHxGG36hM
सीएम धामी के साथ लक्ष्य सेन
- फोटो : Twitter @pushkardhami
बता दें कि हाल ही में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के अंतिम दिन बैडमिंटन के एकल मुकाबले के फाइनल में लक्ष्य सेन ने मलयेशिया के त्जे यंग को तीन गेम तक चले मुकाबले में एक के मुकाबले दो सेट से शिकस्त देकर स्वर्णिम कामयाबी हासिल की थी। सीएम धामी ने भी उन्हें इसके लिए बधाई दी थी।
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लक्ष्य सेन
- फोटो : सोशल मीडिया
लक्ष्य सेन ने बचपन से ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। बचपन में पिता व कोच डीके सेन चार बजे स्टेडियम निकल जाते थे, जबकि मां शिक्षिका थीं। ऐसे में तीन साल की उम्र में पिता ने लक्ष्य को एकेडमी ले जाना शुरू किया।
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लक्ष्य सेन
- फोटो : सोशल मीडिया
वहां एक बार जो लक्ष्य ने रैकेट पकड़ा, इसके बाद बचपन के खेलकूद सब भूल गया। डीके सेन के पारिवारिक मित्र और उनसे प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले गोकुल सिंह मेहता का कहना है कि बचपन में लक्ष्य को रिमोट कार बहुत पसंद थी।
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लक्ष्य सेन
- फोटो : twitter@BAI_media
मम्मी के सामने जब भी वह होता तो रिमोट वाली कार चलाता था, लेकिन पापा डीके सेन के घर आने की आहट होते ही उसे छिपा देता था। धीरे-धीरे स्टेडियम में जब मेहनत ज्यादा पड़ने लगी तो उसने बचपन के खेल और अपनी प्यारी रिमोट कार भी छोड़ दी और बैडमिंटन में अपना करियर बनाया।
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