उत्तराखंड में मानसून की विदाई के बाद से बारिश ने ऐसा मुंह मोड़ा की आज तक नहीं लौटी। सर्दी के मौसम में बारिश की ऐसी बेरुखी 16 साल बाद देखने को मिली है।
16 साल बाद मौसम हुआ बेईमान, पैदा हुआ ये बड़ा संकट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बारिश नहीं होने से जहां मौसम विज्ञानी हैरान हैं, वहीं फसलों का नुकसान देखकर किसान परेशान। इसके अलावा तापमान सामान्य से नीचे नहीं आने से जिस तरह की सर्दी सितंबर में पड़नी चाहिए वैसी ठंड के आसार दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहे हैं।
प्रदेश में इस साल सात अक्तूबर 2016 को मानसून विदाई की घोषणा हुई थी। कुछ जिलों की बात की जाए तो मानसून ने 12 अक्तूबर को अपना बोरिया-बिस्तर समेटा था। हर साल मानसून जाने के बाद दिसंबर तक काफी बारिश हो जाती थी।
अमूमन दिसंबर के महीने तक मसूरी में कई दौर की बर्फबारी तक हो जाती थी। पर इस साल ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा है। मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि प्रदेश में ठंड के सीजन में 90 प्रतिशत तक तापमान सामान्य से ऊपर चल रहा है जबकि गत वर्षों के आंकड़े देखें तो इन दिनों तक तापमान में सामान्य से काफी गिरावट आ जाती थी।
मौसम के बदले मिजाज से प्रदेश में कई जगहों पर रबी की फसलों की बुवाई ही नहीं हो पाई है। कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां रबी की फसल पोस्ट मानसून बारिश और कम तापमान पर निर्भर करती है। गेहूं, जौ, चना, मसूर और सरसों की फसलों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।