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PHOTOS: इन 10 दरगाहों में बसती है दिल्ली की गंगा-जमुनी तहजीब
Thu, 05 Nov 2015 04:27 PM IST
Updated Thu, 05 Nov 2015 04:27 PM IST
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दिल्ली और सूफ़ी फ़लसफ़े का रिश्ता तकरीबन आठ सदी पुराना है। हिंदुस्तान में सूफ़ियों के चिश्तिया सिलसिले की बुनियाद रखने वाले ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के ख़लीफा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी ने तेरहवीं सदी की शुरुआत में महरौली को अपना डेरा बनाया। मुहब्बत और भाईचारे के उनके पैग़ाम की ख़ुशबू चारों तरफ़ फैलने लगी और देहली पर सूफ़ियाना रंग चढ़ता गया। सूफ़ी पीरों के खानकाहों ने दिल्ली को एक अनूठी पहचान दी। (सभी तस्वीरें और आलेख - पार्थिव कुमार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए)
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कभी आंखें बंद किए ज़िक्र और तफ़क्कुर में डूबी हुई और कभी समां और रक्स
की मजलिस सजाए। बाहरी चकाचौंध से दूर उसके दिल में खुदा से प्रेम और
इंसानों के लिए शफ़कत का दरिया बहने लगा। दिल्ली की कला, तहज़ीब और अदब पर
इन खानकाहों का ज़बर्दस्त असर रहा है। इनके दरवाज़े हर मज़हब के लोगों के
लिए हमेशा खुले रहे. वे इस्लामी और हिंदू तसव्वुफ़ों के बीच बहस के इदारा
रहे, जिसका फ़ायदा दोनों मजहबों के अमन-पसंद तबकों को हुआ।
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दरगाह ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख्तियार काकी: कुतुब साहब और इंसानियत के बीच रिश्ता दर्द का था। वे दिन-रात आंखें बंद किए ज़िक्र में डूबे रहते थे। कोई मुलाकाती आता तो उनकी आंखें खुलतीं मगर फिर वे अपनी दुनिया में लौट जाते। भूख लगती तो काक (एक तरह की रोटी) के कुछ निवाले मुंह में डाल ठंडा पानी पी लेते. उनके नाम के साथ 'काकी' इसी वजह से जुड़ गया था।
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क़ुतुब मीनार से कुछ ही दूरी पर महरौली गांव में क़ुतुबुद्दीन बख्तियार की
दरगाह को उनके ख़लीफा शेख़ फ़रीद के नातेदार शेख़ ख़लील ने 1542 में
बनवाया था। मुग़लों समेत कई बादशाहों ने इसकी वुसत की। हर साल उर्स के
दौरान दरगाह पर खूब रौनक होती है। क़ुतुबुद्दीन बख्तियार का जन्म 1173 में
मौजूदा तुर्कमेनिस्तान के औश में हुआ था। उन्होंने अपने मुर्शीद मोइनुद्दीन
के कहने पर ही दिल्ली में रहने का फैसला किया।
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दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया: बेशक सूफ़ी फ़लसफ़े से दिल्ली की पहली पहचान क़ुतुबुद्दीन बख्तियार ने कराई थी, लेकिन इसे अवाम के बीच फैलाने का एतराफ़ निज़ामुद्दीन को जाता है। बाबा फ़रीदुद्दीन गंजेशकर के खलीफ़ा निज़ामुद्दीन, मज़हब को सियासत से अलग रखने के हिमायती थे। वे मानते थे कि सत्ता के क़रीब जाने से अवाम और उनके बीच फ़ासला बढ़ जाएगा।
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