शाहबेरी गांव में मंगलवार रात गिरी दो बिल्डिंगों का मलबा 64 घंटे के राहत कार्य के बाद हटा दिया गया। मलबे से कुल 9 शव निकाले गए। वहीं, शुक्रवार को मलबे से एक कटा हुआ पैर मिला। पुलिस का कहना था कि मलबे से चौथे नंबर पर निकाले गए व्यक्ति यह पैर है। हालांकि, उस दौरान पुलिस ने पैर गायब होने की जानकारी नहीं दी थी।
शाहबेरी हादसा: 64 घंटे में हटा मलबा-कुल 9 शव हुए थे बरामद, एक कटा पैर मिला
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हादसे के बाद रात लगभग 11:30 बजे राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ था। विभिन्न टीमें राहत और बचाव के काम में जुटी थीं। एनडीआरएफ की टीमें शुक्रवार को काम पूरा कर लौट गईं। शुरुआत में देरी से राहत और बचाव कार्य शुरू होने पर लोग आरोप लगा रहे थे, लेकिन मलबा हटते ही एनडीआरएफ की सराहना करते नजर आए। मलबे से निकले शवों में चार मैनपुरी निवासी एक परिवार थे। बाकी पांच मजदूरों के थे। वहीं, शुक्रवार को केस में फरार चल रहे किसी अन्य आरोपी की गिरफ्तारी भी नहीं कर पाई।
... तो एक ही परिवार ने किया था शिफ्ट
राहत और बचाव कार्य पूरा होने के बाद ये लगभग स्पष्ट हो गया कि हादसे का शिकार हुई दो बिल्डिंगों में एक निर्माणाधीन और दूसरी तैयार हो चुकी थी। तैयार बिल्डिंग में छह और सात परिवार के शिफ्ट करने की हादसे के बाद जानकारी दी गई थी, लेकिन मलबा हटने के बाद केवल एक परिवार के शिफ्ट होने की ही पुष्टि हो पाई, क्योंकि किसी अन्य परिवार के लोग या रिश्तेदार घटना स्थल तक नहीं पहुंचे।
मलबे से निकला घरेलू सामान
राहत कार्य के अंतिम दिन मलबे से घरेलू सामान निकलने का सिलसिला जारी रहा। मलबे से बुधवार सुबह को ही वहां शिफ्ट हुए परिवार या सामान रखकर गए परिवार का सामान निकला था। यहां से कपड़े, घरेलू सामान के अलावा आभूषण और नकदी भी बरामद की गई थी। शुक्रवार को भी मलबे से एक बाइक, घरेलू सामान और बैग आदि सामान मिला।
एनडीआरएफ की चार व एक एसडीआरएफ की टीम लगी रही
घटना के बाद मंगलवर रात करीब 11:30 बजे ही एनडीआरएफ की टीम पहुंच गई थी। बुधवार को चार टीमें लगी रहीं। जबकि बृहस्पतिवार को दो टीमें वापस हो गईं और एक राज्य आपदा प्रबंधन दल (एसडीआरएफ) की टीम ने भी मोर्चा संभाल लिया। शुक्रवार को दोपहर एक बजे तक राहत और बचाव कार्य चला। इसके बाद टीम वापस गाजियाबाद चली गई।