फरीदाबाद से गिरफ्तार सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल से जुड़े डॉ. मुजम्मिल गनई ने इस साल जनवरी में कई बार लाल किला इलाके की रेकी थी। उसके मोबाइल फोन के डंप डाटा से यह खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियां मान रही हैं कि रेकी 26 जनवरी को इस ऐतिहासिक स्मारक को निशाना बनाने की साजिश के तहत की गई थी, पर तब यह साजिश नाकाम हो गई। जांचकर्ताओं को फरीदाबाद के सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के तहत पकड़े गए आठ संदिग्धों से पूछताछ में इस साजिश का पता चला है। एजेंसियों के मुताबिक, लाल किला, इंडिया गेट, कॉन्स्टीट्यूशन क्लब और गौरी शंकर मंदिर उनके निशाने पर थे। देशभर में रेलवे स्टेशनों और शॉपिंग मॉल्स को भी निशाना बनाने की तैयारी थी।
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डॉ. मुजम्मिल की फाइल फोटो
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मुजम्मिल और धमाके के आरोपी डॉ. उमर नबी के तुर्किये कनेक्शन का भी खुलासा हुआ है। वहीं, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने विशेष जांच दल का गठन कर धमाके की जांच शुरू कर दी है।
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संदिग्ध डॉ. मोहम्मद उमर
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दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुजम्मिल के मोबाइल फोन के डाटा से पता चला है कि जनवरी के पहले सप्ताह में लाल किला क्षेत्र में और उसके आसपास उसकी बार-बार मौजूदगी थी। मुजम्मिल अपने सहयोगी उमर के साथ सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ के पैटर्न का अध्ययन करने के लिए कई बार वहां गया था।
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दिल्ली में हुए धमाके के बाद मौके पर तैनात सुरक्षाबल
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टावर लोकेशन डाटा और नजदीकी इलाकों से जुटाए गए सीसीटीवी फुटेज से उनकी गतिविधियों की पुष्टि हुई है। जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि उमर और मुजम्मिल तुर्किये भी गए थे। जांचकर्ताओं को उनके पासपोर्ट में तुर्किये के आव्रजन टिकट मिले हैं।
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दिल्ली में हुए धमाके के बाद मौके पर तैनात पुलिसबल
- फोटो : पीटीआई
अब जांच की जा रही है कि क्या दोनों अपनी यात्रा के दौरान किसी विदेशी हैंडलर से मिले थे। जांचकर्ता मुजम्मिल के संचार और डिजिटल फुटप्रिंट का भी विश्लेषण कर रहे हैं, ताकि मॉड्यूल की गतिविधियों के लिए धन और विस्फोटकों के स्रोत के बारे में पता लगाया जा सके। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या अन्य संदिग्धों ने भी इसी तरह की टोह ली थी या गिरफ्तार संदिग्धों को रसद सहायता दी थी।