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Delhi Gokulpur fire three hours of incident were difficult for residents their relatives burn to death in front of them read their ordeal
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चुपके से आई मौत: शांत हुई लपटें तो कोयला मिले शव, शोर के बीच न सुन सके मासूमों की चीखें
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Mon, 14 Mar 2022 09:42 AM IST
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बिलखते परिजन
- फोटो : विवेक निगम/जी पाल
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दिल्ली के गोकुलपुर गांव में बीते शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात को लगी आग में जो 33 झुग्गियां जल गईं, उनके परिवार अब भी इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। इसका कारण है कि इनमें से कई लागों ने अपने मासूमों को अपने सामने ही आग की भेंट चढ़ते देखा और चाह कर भी कुछ नहीं कर सके। इनके दिलों में कितनी बैचेनी और लाचारगी है इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। पीड़ितों को मलाल तो इस बात का भी है कि उन्हें अपने मासूमों की चीखें भी नहीं सुनाई दीं।
मासूम रोशन और उसकी नन्ही सी बहन दीपिका आग की लपटों के बीच जिंदगी की तलाश में एक झोपड़ी में घुस गए। लेकिन वह मौत को चकमा नहीं दे पाए। मौत ने उनको ढूंढ ही लिया और दोनों को अपने आगोश में ले लिया। आग की ऊंची-ऊंची लपटों और शोर-शराबे की बीच मासूमों की चीख भी लोगों को नहीं सुनाई दी।
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तबाही का मंजर
- फोटो : अमर उजाला
पिंटू और उसकी पत्नी रोमा अपने बच्चों को तलाशते रहे। लेकिन उनका पता नहीं चला। आग का तांडव करीब तीन घंटे चला। परिजन पल-पल यह दुआ करते रहे कि उनके बच्चे सुरक्षित रहे। लेकिन जब आग पर काबू पाकर रेस्क्यू टीम अंदर झोपड़ियों में दाखिल हुई तो वहां एक झोपड़ी में दोनों मासूमों के शव एक जगह बरामद हुए। शव लगभग कोयला बन चुके थे। शुरुआत में परिवार को यकीन ही नहीं हुआ कि दोनों बच्चे उनके ही हैं। लेकिन बाद में जांच के बाद पिंटू और रोमा को यह साफ हो गया कि दोनों उनके ही जिगर के टुकड़े हैं। पिंटू बच्चों की मौत के बाद से बहकी-बहकी बातें कर रहा है।
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बिलखते परिजन
- फोटो : विवेक निगम
एक परिजन ने बताया कि आग लगी तो पिंटू और रोमा बच्चों को लेकर बाहर की ओर भागे। पिंटू व उसकी पत्नी ने छोटे बच्चों को गोद में लिया हुआ था। रोशन व उसकी बहन दीपिका माता-पिता के साथ चल रहे थे। आग तेजी से फैल रहे थे। झोपड़ियों की गैलरी में आग देखकर बच्चे डर गए और पता ही नहीं चला कब एक महिला की झोपड़ी में घुस गए। पिंटू और रोमा ने बाहर निकलकर देखा तो बच्चे साथ नहीं था। दोनों के होश उड़ गए। अंदर आग और भड़क चुकी थी।
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बिलखते परिजन
- फोटो : विवेक निगम
शोर शराबे के बीच उनको कुछ समझ नहीं आ रहा था। शुरुआत में लगा कि बच्चे शायद भीड़ में इधर-उधर हो गए हैं, लेकिन बाद में उनकी मौत का पता चला। वहीं दूसरी ओर रज्जन के परिवार के पांच सदस्य एक छोटे कमरेनुमा झोपड़ी में मौत के मुंह में चले गए। परिजनों का कहना है कि शोर-शराबा हुआ और अचानक उनको घुटने होने लगी तो सभी ने एक दूसरे को जगा दिया।
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fire in gokalpuri delhi
- फोटो : अमर उजाला
जल्दी-जल्दी सभी को उठाकर बाहर निकाला जाने लगा। आग तेजी से बढ़ती हुई आ रही थी। सभी लोग निकले लेकिन बबलू का 11 वर्षीय बेटा अमित उर्फ शहंशाह अंदर ही रह रहा। बबलू उसे बचाने भागा। वहीं बाकी परिजन रेशमा के दहेज के लिए रखे सामान निकालने के चक्कर में वहां फंस गए। परिवार के पांच लोग अंदर रह गए। इस बीच आग भी बढ़ती हुई रज्जन की झुग्गी तक पहुंच गई। इसके बाद किसी को कुछ समझने का मौका भी नहीं मिला और आग ने जमकर तांडव मचाया। आग में बबलू, उसके भाई रंजीत, बहन रेशमा, भाभी प्रियंका और बबलू के बेटे अमित उर्फ शंहशाह की मौत हो गई। स्थानीय लोगों का कहना था बबलू की मां मुन्नी और सुजीत भी आग में फंसे होते, लेकिन लोगों ने उनको अंदर जाने से रोक लिया। आग पर काबू पाने के बाद सभी के शव बरामद हुए।
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