हर गली में मातम के बीच-बीच में रोने की आवाज, घरों में मातम पसरा है तो सड़कों पर वीरानी। भाग्य विहार के लिए मुंडका अग्निकांड दुर्भाग्य बन गया। कभी मदनपुर डबास क्षेत्र की 10 से अधिक बेटियां इसी इमारत में काम करती थीं, जहां भीषण आग लगने से 27 से अधिक लोगों की मौत हो गई। इनमें से एक की शिनाख्त के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। छह अभी भी गुमशुदा हैं जबकि शेष भीषण आग की चपेट में खुद को किसी तरह बचाने में कामयाब रहीं। गुमशुदा बेटियों में से एक निशा के परिजनों की नाउम्मीदी हावी है। अगर मेरी बेटी(निशा) नहीं लौटी तो शेष छह बेटियों का गुजारा कौन करेगा, किसके भरोसे रहूंगी।
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भाग्य विहार में अपनों के लिए विलाप करते लोग
- फोटो : भूपिंदर सिंह
निशा की मां ने बताया कि उनकी सात बेटियां हैं। निशा को अगर कुछ हो जाता है तो परिवार का गुजारा मुश्किल हो जाएगा। सबसे छोटी बेटी दो महीने की है जबकि एक 10 वर्षीय बेटी दिव्यांग है। निशा के पिता गुड्डू प्रसाद कुछ काम नहीं करते हैं और पूरे परिवार का गुजारा निशा की कमाई पर ही चल रहा है। मां ने बताया कि मेरी बेटी का कोई सुराग नहीं मिला है। कई जगह तलाश की लेकिन कोई खबर न लगी।
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भाग्य विहार में पसरा सन्नाटा
- फोटो : भूपिंदर सिंह
20 वर्षीय निशा को अपने परिवार का गुजारा करने के लिए पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पिता कमाई नहीं करते हैं तो मां छोटी बच्ची होने के कारण अब कहीं काम करने भी नहीं जा सकती हैं। पिछले दो वर्ष से निशा इस फैक्टरी में काम करती थी और अपनी कमाई से पूरे परिवार का गुजारा करती रही। मां ने बताया कि जिस दिन मुंडका के उस इमारत में आग लगी, उससे पहले सुबह में जल्दबाजी में वह ड्यूटी के लिए रवाना हुई।
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भाग्य विहार का एक दृश्य
- फोटो : भूपिंदर सिंह
चाय कभी नहीं पीती थी, इसलिए मम्मी के कहने पर दूध पीकर काम पर चली गई। घटना के पहले पूरे दिन मां की बात नहीं हो सकी, लेकिन उम्मीद थ कि शाम तक बेटी रोजाना की तरह घर लौटेगी। घटना की जानकारी मिलते ही उसकी तलाश शुरू कर दी गई, लेकिन अब तक बेटी के लौटने का इंतजार है।
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आग में झुलसी युवती
- फोटो : अमर उजाला
काजल ने लगाई छलांग तो भतीजे ने बचाई जान
इसी क्षेत्र से सीसीटीवी, राउटर और आरओ बनाने वाली कंपनी में काम करने वाली काजल को उनके भतीजे ने बचाया। मनीष ने बताया कि जैसे ही इस घटना की जानकारी मिली तत्काल वहां पहुंचे और फिर उसे सुरक्षित निकलने का हौंसला दिया। मनीष ने बताया कि वह एनसीसी में रह चुका है इसलिए इमारत से छलांग लगाने के लिए अपनी बुआ को कहा। दूसरी मंजिल से छलांग लगाने के बाद उसे बचा लिया। उसकी एक दोस्त को भी बचाया। इसी क्षेत्र की शाजिया सहित कई और बेटियां जख्मी हुईं। लेकिन हौसला नहीं हारी और उनके जज्बे को सभी सलाम करते हैं। इलाके की रंजू देवी, आशा सहित कई और महिलाओं का अब तक सुराग नहीं मिला है। इसी क्षेत्र में रहने वाली यशोदा की मुंडका अग्निकांड में मौत हो गईं। शव की पहचान के बाद उनके शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।