मुंडका की आग से ज्यादा तकलीफदेह है भूखे बच्चों के पेट की आग। भीषण आग से बच गईं महिलाओं के हालात इसके गवाह हैं। इन महिलाओं के पास हादसे का शोक मनाने का भी वक्त नहीं है। इन्हें अपनी आजीविका और भविष्य को लेकर चिंता सता रही है।
Delhi Mundka Fire: पीड़ित महिलाओं के पास नहीं शोक मनाने का भी वक्त, बैठीं रहीं तो कैसे बुझेगी भूखे बच्चों के पेट की आग
मुंडका अग्निकांड में 27 लोगों ने जान गंवाई, जिसमें 21 महिलाएं शामिल हैं। कई मरने वालों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। इस हादसे में ममता बच गईं, लेकिन उनकी दोनों हथेलियां जल गई हैं। बिल्डिंग से कूदने के कारण उनके घुटनों में भी गंभीर चोट आई है। उन्हें चलने फिरने में मुश्किल हो रही है। जबतक ठीक न हो जाएं, डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है।
मुबारकपुर डबास की प्रवेश नगर कॉलोनी निवासी ममता को अपने परिवार की आजीविका की फिक्र हो रही है। उनके परिवार के नौ सदस्य उन्हीं पर आश्रित हैं। मौजूदा समय अपने छोटे बच्चों के लिए खाने का इंतजाम करना उनकी सबसे बड़ी चुनौती है। उनके पति शारीरिक रूप से आशक्त है, इनके सात बच्चे हैं, जिनमें से पांच बेटियां हैं। उनके दोनों बेटे पढ़ाई के साथ-साथ दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। लेकिन मौजूदा समय उनके पास कोई काम नहीं है।
ममता परिवार में कमाने वाली एकमात्र सदस्य थीं। अब वह बिना काम के घर पर बैठी हैं। उन्हें फिक्र हो रही है कि वह अपने परिवार का भरण पोषण कैसे करेंगी? ममता की ही तरह प्रवेश नगर में रहने वाली तमाम महिलाएं सीसीटीवी कैमरे और राउटर बनाने वाली कंपनी में काम कर करती थी, उसी से उनके परिवार का गुजारा होता था। अग्निकांड के बाद इन सभी लोगों के घर में रोजी रोटी को लेकर संकट उत्पन्न हो गया है।
मौजूदा समय प्रवेश नगर में कोई भी आग की घटना के बारे में बात नहीं कर रहा। ये आर्थिक रूप से कमजोर लोग हैं। स्थानीय निवासी मालती ने कहा कि यहां दूसरा काम मिलना मुश्किल है। क्योंकि यहां पर बहुत ज्यादा फैक्ट्रियां नहीं हैं। उनके पास बहुत ज्यादा जमां पूंजी भी नहीं है, जिससे वह अपना गुजारा कर सकें। मालती ने बताया कि उन्हें इस घटना में मामूली चोटें आई हैं और वह दर्द निवारक दवाएं ले रही हैं।
मालती ने कहा कि उनकी कई सहेलियां इस हादसे में मारी गई हैं, यह उनके लिए बड़ा मुश्किल वक्त है। लेकिन अब उन्हें केवल एक बात की फिक्र सबसे ज्यादा है कि वह कारखाने में काम करके हर महीने करीब 10 हजार रुपये कमा लेती थीं। अब वह अपना घर कैसे चलाएंगी।
