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Mundka Fire: अपने दुर्भाग्य को कोस रहे भाग्य विहार के लोग, बोले- आग में खाक हुए हमारे अरमान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 16 May 2022 10:26 AM IST
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Delhi Mundka Fire
- फोटो : अमर उजाला
हर गली में मातम के बीच बीच बीच में रोने की आवाज। घरों में मातम पसरा है तो सड़कों पर वीरानी। भाग्य विहार के लिए मुंडका अग्निकांड दुर्भाग्य बन गया। कभी मदनपुर डबास क्षेत्र की 10 से अधिक बेटियां इसी इमारत में काम करती थी, जहां भीषण आग लगने से 27 से अधिक लोगों की मौत हो गई। इनमें से एक की शिनाख्त के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। छह अभी भी गुमशुदा हैं जबकि शेष भीषण आग की चपेट में खुद को किसी तरह बचाने में कामयाब रहीं। गुमशुदा बेटियों में से एक निशा के परिजनों की नाउम्मीदी हावी है। अगर मेरी बेटी (निशा) नहीं लौटी तो शेष छह बेटियों का गुजारा कौन करेगा, किसके भरोसे रहूंगी। निशा की मां ने बताया कि उनकी सात बेटियां हैं। निशा को अगर कुछ हो जाता है तो परिवार का गुजारा मुश्किल हो जाएगा। सबसे छोटी बेटी दो महीने की है जबकि एक 10 वर्षीय बेटी दिव्यांग है।
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Delhi Mundka Fire
- फोटो : भूपिंदर सिंह
निशा के पिता गुड्डू प्रसाद कुछ काम नहीं करते हैं और पूरा परिवार का गुजारा निशा की कमाई पर ही चल रहा है। मां ने बताया कि अगर मेरी बेटी का कोई सुराग नहीं मिला है। कई जगह तलाश की लेकिन सुराग नहीं मिल सका है।
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निशा कुमारी का अभी तक कुछ पता नहीं चल पा रहा है, घर के बाहर रोते-बिलखते अपनी बहन की राह ताकती निगाहें
- फोटो : भूपिंदर सिंह
20 वर्षीय निशा को अपने परिवार का गुजारा करने के लिए पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पिता कमाई नहीं करते हैं तो मां की छोटी बच्ची होने के कारण अब कहीं काम करने भी नहीं जा सकती हैं। पिछले दो वर्ष से निशा इस फैक्ट्री में काम करती थी और अपनी कमाई से पूरे परिवार का गुजारा करती रही।
Delhi Mundka Fire
- फोटो : अमर उजाला
मां ने बताया कि जिस दिन मुंडका के उस इमारत में आग लगी, उससे पहले सुबह में जल्दबाजी में वह ड्यूटी के लिए रवाना हुई। चाय कभी नहीं पीती थी, इसलिए मम्मी के कहने पर दूध पीकर काम पर चली गई। घटना के पहले पूरे दिन मां की बात नहीं हो सकी, लेकिन उम्मीद थी कि शाम तक बेटी रोजाना की तरह घर लौटेगी। घटना की जानकारी मिलते ही उसकी तलाश शुरू कर दी गई, लेकिन अब तक बेटी के लौटने का इंतजार है।
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विजय बहादुर तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
जिद करके बाहर निकलती थी लाडली...
बेटी की जिद के आगे एक बेबस पिता आज नम आंखों से अपनी बेटी की तलाश में दर दर भटक रहे हैं। पिता ने बेटी को 12वीं तक पढ़ाने के बाद उसे सिलाई मशीन खरीदकर दी थी और घर पर ही काम कर दो चार पैसे कमाने के लिए कहा। लेकिन कुछ दिन काम करने के बाद बेटी का मन नहीं लगा और उसने पिता से जिद कर मुंडका की कंपनी में काम करना शुरू कर दिया था।
बेटी की जिद के आगे एक बेबस पिता आज नम आंखों से अपनी बेटी की तलाश में दर दर भटक रहे हैं। पिता ने बेटी को 12वीं तक पढ़ाने के बाद उसे सिलाई मशीन खरीदकर दी थी और घर पर ही काम कर दो चार पैसे कमाने के लिए कहा। लेकिन कुछ दिन काम करने के बाद बेटी का मन नहीं लगा और उसने पिता से जिद कर मुंडका की कंपनी में काम करना शुरू कर दिया था।
