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पालम अग्निकांड: जिन बच्चों को गोद में खिलाया, उनकी किलकारी कानों में गूंज रही; बच्चों को याद कर पड़ोसी भावुक

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Sharukh Khan Updated Fri, 20 Mar 2026 09:09 AM IST
सार

दिल्ली के पालम में हुए भीषण अग्निकांड में जान गंवाने वाले बच्चों को याद कर पड़ोसी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि घटना के समय आग की लपटों में फंसा कमल और उनका परिवार छज्जे पर खड़ा था। समय पर मदद मिलती तो जान बच जाती। 

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Delhi Palam Fire Neighbors grew emotional while remembering the children who lost their lives in the fire
delhi fire - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
हम सभी सो रहे थे कि अचानक बचाओ बचाओ चिल्लाने की आवाज आई। बाहर निकलकर देखा तो राजेंद्र कश्यप के घर से धुंआ निकल रहा था। आग नीचे के माले पर लगी थी, देखते की देखते आग ऊपर की मंजिलों तक पहुंच गई। इस दौरान घर के अंदर से बच्चों की चीख-पुकार की आवाज आ रही थी। काफी मशक्कत के बाद भी उन मासूमों को हम नहीं बचा सके जो हमारे सामने पैदा हुए थे। बच्चों को हमने गोद में खिलाया था। आज उनकी किलकारी कानों में गूंज रही है। यह कहते हुए पड़ोसी सनी की आंखें नम हो गई और उनके चेहरे पर मायूसी छा गई।
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Delhi Palam Fire Neighbors grew emotional while remembering the children who lost their lives in the fire
पालम इलाके में बुधवार को हुए अग्निकांड घटनास्थल पर बृहस्पतिवार को फॉरेंसिक टीम जांच करते हुए - फोटो : भूपिंदर सिंह
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के साध नगर इलाके में बुधवार को हुए भीषण आग हादसे में कमल नामक व्यक्ति अपनी जान गंवा बैठे। ऐसे में बृहस्पतिवार को पड़ोसियों ने बताया कि घटना के समय उनलोगों ने देखा कि कमल और उनका परिवार छज्जे पर खड़ा था और हादसे के दौरान हाइड्रोलिक सिस्टम खुलने में देरी हुई, जिससे बचाव कार्य प्रभावित हुआ। 

 
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पालम इलाके में बुधवार को हुए अग्निकांड घटनास्थल पर बृहस्पतिवार को फॉरेंसिक टीम जांच करते हुए - फोटो : भूपिंदर सिंह
धुएं के गुबार के चलते लोगों को बचाना मुश्किल
पड़ोसियों का दावा है कि मृतक अपने छज्जे पर खड़े होकर घर के उस खौफनाक मंजर को देख रहे थे। जो हर पल उन्हें काल के मुंह की ओर धकेल रहा था। स्थानीय पड़ोसी और मार्केट के उपाध्यक्ष आशीष गुप्ता ने बताया कि धुएं के गुबार के चलते लोगों को बचाना मुश्किल हो गया। 

 
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परिवार के मुखिया राजेंद्र कश्यप को परिचित और आसपास के लोग ढांढस बंधाते नजर आए। - फोटो : भूपिंदर सिंह
उन्होंने कहा कि अगर सिस्टम सही समय पर काम करता और हाइड्रोलिक वाहन जल्दी पहुंचता, तो कमल और उनके परिवार की जान बच सकती थी। इस देरी और तकनीकी विफलता के कारण परिवार राख का ढेर बन गया।
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परिवार के मुखिया राजेंद्र कश्यप को परिचित और आसपास के लोग ढांढस बंधाते नजर आए। - फोटो : भूपिंदर सिंह
सदमे में पड़ोसी
स्थानीय लोग और पड़ोसी घटना को लेकर शोक में हैं। कई पड़ोसियों ने कहा कि बचपन में जिन बच्चों को गोद में उठाया था, उनकी चीख पुकार उनकी कानों में अभी भी गुंज रही है। उनलोगों ने ऐसे हालात से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए तकनीकी उपकरणों का सही और समय पर उपयोग बेहद जरूरी है।
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