दुनियाभर में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें भूत-प्रेत की कहानियां रोमांचित करती हैं तो वहीं काफी ऐसे भी हैं जिनकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है। भूत-प्रेत और आत्माओं के अस्तित्व में दिलचस्पी लेने वाले लोग इस दुनिया में काफी हैं। कुछ लोग इन पर विश्वास करते हैं। तो वहीं कुछ इसे महज अफवाह और भ्रम कहकर टाल देते हैं। लेकिन समय-समय पर ऐसी घटनाएं होती रही हैं जिन्होंने सुनकर यकीन होने लगता है कि सच में भूत-प्रेत और आत्मा जैसी चीजें हैं। खैर जो भी हो लेकिन अगर आप भी डरावनी चीजों के शौकीन हैं और साथ ही ऐसी भूतिया जगहों की सैर करना चाहते हैं तो आप सही जगह पर आये हैं। आज हम आपको दिल्ली की एक ऐसी जगह पर के बारे में बताएंगे जहां जाने के बारे में सोचकर भी लोगों की रूह कांप उठती है। रात की तो दूर की बात दिन में भी वहां जाने से डर लगता है।
Delhi Haunted Place: रात में आती है यहां रोने और चीखने की आवाजें, सिहरन पैदा कर देगी 'हॉन्टेड वॉक'
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अगर आपको भूत प्रेत का एहसास लेना हो या फिर डरावने रास्ते पर चलना हो तो दिल्ली में आपको पहुंच जाना है फिरोजशाह कोटला स्मारक। यहां आपके रोमांच से जुड़ी हर वो चीज मिलेगी जिसे आप कभी भूल नहीं पाएंगे। स्मारक की हर शनिवार और रविवार की हॉन्टेड वॉक में आपको अलग तरह का अनुभव होगा। कहा जाता है कि हर गुरुवार यहां मोमबत्तियां और अगरबत्ती जलती दिखाई देती हैं, जो देखने में बेहद डरावना है। इसके अगले दिन किले के कुछ हिस्सों में कटोरे में दूध और कच्चा अनाज भी रखा मिल जाता है। इस वजह से लोग इस किले में जाने से डरते हैं।
खूनी दरवाजे से स्मारक के अंदर के अशोक स्तंभ के करीब तीन किमी के रास्ते में आपकी चाहतें पूरी हो जाएंगी। दिलचस्प यह कि दो सप्ताह पहले शुरू हुई इस वॉक को दिल्लीवाले पसंद भी कर रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो अभी तक 200 लोगों ने इस डरावने रास्ते का लुत्फ उठाया है। स्मारक में पथरीले मार्ग से गुजरकर रास्ता तय करना पड़ता है। सड़क के बीच स्थित खूनी दरवाजे के पास पेड़ व झाड़ियां हैं। इसी रास्ते से होकर कंटीली झाड़ियों के बीच में यह स्मारक है। पर्यटकों को दूर से ही यह स्मारक भूतिया होने की अनुभव कराता है। कहा जाता है कि रात में यहां चीखने और रोने की आवाजें आती हैं।
शिकारगाह के लिए बनवाया था स्मारक
सुल्तान फिरोज शाह तुगलक ने सन 1354 में इस स्मारक को अपने शिकारगाह के लिए बनवाया था। फिरोज शाह के समकालीन इतिहासकार शम्स सिराज अफीफ ने लिखा है कि नगर की इमारतें उत्तरी रिज पर फिरोज शाह द्वारा बनवाए गए महल व शिकारगाह (जो वर्तमान में पीर गायब के नाम से जानी जाती है) तक फैली है। इसमें लाल कोट पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। दिल्ली टूरिज्म टूरिज्म ट्रांसपोर्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने यहां हुई घटनाओं के चलते इसे हॉन्टेड हाउस माना है। हालांकि, स्मारक में लोगों ने जगह-जगह दिए व अगरबत्ती जलाए हुए नजर आते हैं। यह जगह सुनसान है। लोगों का मनाना है कि यहां से शाम के समय डरावनी आवाजें सुनाई आती हैं।
इतिहास से रूबरू कर रहा स्मारक
इसकी कहानियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए और इतिहास से रूबरू कराने के लिए डीटीटीडीसी हॉन्टेड वॉक लेकर आया है। डीटीटीडीसी के अधिकारियों ने बताया कि पहले इसके बारे में लोगों के बीच जानकारी का अभाव था, लेकिन अब लोग देश ही नहीं विदेश से भी पर्यटक भी पहुंच रहे हैं। बीते माह से अब तक 200 से अधिक पर्यटक यहां की सैर करने आ चुके हैं। पर्यटकों के बीच यह जगह तेजी से मशहूर हो रही है। बाहर कोई बोर्ड भी नहीं है, जिससे बोर्ड भी जल्द लगाया जाएगा। वॉक के लिए डीटीटीडीसी की वेबसाइट से बुकिंग की जा सकती है।