करावल नगर पूर्वोत्तर दिल्ली के शिव विहार निवासी सुदेश कुमार ने जेल और सजा से बचने के लिए खौफनाक घटना को अंजाम दे डाला। इसके लिए उसने 18 नवंबर को लेबर चौक पर जाकर अपनी कद-काठी के मजदूर दोमन रविदास निवासी जिला गया, बिहार को देखा और काम के लिए घर ले आया। उसी दिन सुदेश ने अपने कपड़े उसे पहनने के लिए दे दिए। अगले दिन मजदूर वही कपड़े पहन कर सुदेश के घर आया फिर शाम को पार्टी के बहाने सुदेश ने मजदूर को रोक लिया और खूब शराब पिलाई। आगे पढ़िए कि कैसे वह सबूत जो सुदेश ने अपनी पहचान के लिए मृतक की जेब में छोड़ा था वही सुदेश के कारनामे का सबूत बना और अब दोनों पति-पत्नी जेल की सलाखों के पीछे हैं...
बेटी का हत्यारा बना हैवान: जिस सबूत के बल पर हत्या की सजा से बचने की रची साजिश, वही बन गया जेल जाने की वजह
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आधार कार्ड ही बन गया साजिश के खुलासे की वजह
19 नवंबर को दोमन रविदास उसी के कपड़े पहनकर काम पर आया। शाम को पार्टी के बहाने रोक लिया। रात करीब 9 बजे जब वह नशे में धुत हो गया तो सुदेश और उसकी पत्नी ने चारपाई के पाये से सिर पर ताबड़तोड़ हमला कर दोमन रविदास की हत्या कर दी। दोमन की पहचान छिपाने के लिए उसका चेहरा जला दिया। इसके बाद खुद को मरा साबित करने के लिए सुदेश ने मृतक की जेब में अपना आधार कार्ड रख दिया। इसी आधार कार्ड से शक होने पर गाजियाबाद पुलिस ने 20 नवंबर की रात हुई घटना का खुलासा करते हुए शुक्रवार रात आरोपी पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया।
आन के सम्मान को बचाने के लिए की थी बेटी की हत्या, पैरोल पर आया था बाहर
एसपी ग्रामीण डॉ. ईरज राजा ने बतया कि मार्च 2018 में सुदेश ने अपनी 13 वर्षीय बेटी वंशिका की चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी। दो बार घर से चले जाने के चलते उसने गुस्से में ऐसा किया। हत्या के बाद सुदेश ने दिल्ली में खुद ही बेटी की गुमशुदगी लिखाई, लेकिन बाद में उसका राज खुल गया। दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर मंडोली जेल भेजा था। कोरोना काल में अन्य कैदियों की तरह सुदेश 21 मई को पैरोल पर जेल से छूटा था। इसी बीच उसे पता चला कि उसे बेटी की हत्या में सजा होने वाली है। इससे बचने के लिए सुदेश ने खुद को मरा दर्शाने की साजिश रची।
दिल्ली में दर्ज थी मजदूर की गुमशुदगी
मजदूर दोमन रविदास दिल्ली के करावल नगर में ही साथियों के साथ किराए पर रहता था। दो दिन से कोई सुराग न लगने पर साथियों ने परिजनों को बताया, जिसके बाद दोमन के बेटे ने लापता होने के तीन दिन बाद करावल नगर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
बेटे के बयान और कद में अंतर ने दी पुलिस के शक को मजबूती
पुलिस ने सुदेश की पत्नी व 13 वर्षीय बेटे से अलग-अलग पूछताछ की। बेटे ने कहा कि 19 नवंबर को मम्मी-पापा ने उसे दुकान पर भेज दिया था। घर में शोर होने पर वह पहुंचा तो दोनों ने उसे वापस भेज दिया। वहीं, पुलिस ने शव और सुदेश के कद की पड़ताल की 5 इंच का अंतर मिला। इससे भी पुलिस के शक को बल मिला।