गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित डीएलएफ कॉलोनी में पांच मई के दिन हुई महिला की हत्या और लूट मामले में जांच कर रही पुलिस जब असली हत्यारोपी तक पहुंची तो उसके होश उड़ गए। जांच में सामने आया है कि मृतका के पति के उसकी मुंहबोली मौसी से बीते 12 साल से प्रेम संबंध हैं। दोनों साथ ही रहते थे लेकिन इसकी जानकारी लोगों को नहीं थी। लेकिन जब पति संतोष की शादी संतोषी से हुई तो कुछ दिन बाद ही दोनों का राज उस पर जाहिर हो गया, जिसके बाद घर में तनाव रहने लगा। यह सभी बातें पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए बताई हैं।
गाजियाबाद: तीन दिन तक पुलिस को गुमराह करती रही 'गर्लफ्रेंड मौसी', संतोषी की डायरी ने खोले चौंकाने वाले राज
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डायरी से मिला पुलिस को सुराग
पद्मावती ने शांति के बारे में बता दिया था, लेकिन वह पूछताछ में सच नहीं बोल रही थी। पुलिस को उस पर शक था लेकिन सुबूत नहीं मिल रहे थे। ऐसे में पुलिस का काम आसान किया मौके से मिली संतोषी की डायरी ने। इसमें उसने संतोष और शांति के रिश्ते के बारे में लिख रखा था। इसके बाद शांति से सख्ती से पूछताछ हुई तो उसने सच उगल दिया।
संतोषी की डायरी से हुई पुलिस की टेंशन कम
वारदात को शुरुआत में लूट के दौरान हत्या करना माना जा रहा था। पुलिस अधिकारी भी लूट के एंगल से जांच कर रहे थे। परिवार ने शक जाहिर किया था कि पास के निर्माणाधीन फ्लैट से मजदूर पानी लेने घर आते थे, उन्होंने लूट के बाद हत्या कर दी। पुलिस ने 15 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो भी तस्वीर साफ नहीं हुई। इस बीच पुलिस को संतोषी के कमरे से एक डायरी मिली जिसने पुलिस अधिकारियों की पूरी टेंशन ही खत्म कर दी।
मौसी ने तीन दिन तक पुलिस को किया गुमराह
घटना के दिन पुलिस ने कई संदिग्धों से पूछताछ की। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई लेकिन उसमें भी कोई अहम सुराग हाथ नहीं लग रहा था। मृतका की डायरी मिलने से पहले पुलिस को मुखबिर तंत्र ने संतोषी के घर में 5 मई की सुबह लड़ाई-झगड़ा होने की अहम बात बताई तो अधिकारियों का मौसी पर शक गहरा गया। इसके बाद उससे पूछताछ की गई पर पूछताछ में भी शांति ने तीन दिन तक पुलिस को गुमराह किया। जब उसे सभी सबूत दिखाए गए तो वह खुद-ब-खुद वारदात को कबूल करती गई।
पुलिस ने संतोष को भी गिरफ्तार कर लिया है। उस पर दहेज के लिए संतोषी के उत्पीड़न का आरोप है। हालांकि, हत्या में उसकी भूमिका नहीं मिली। वह पांच मई को रात आठ बजे ड्यूटी से लौटा था। उसने शांति के बारे में पुलिस को नहीं बताया। कई बार पुलिस से कहा कि हत्या में मजदूरों का हाथ हो सकता है। पास में ही निर्माण कार्य चल रहा था। वहां कई मजदूर काम कर रहे थे। आसपास लगे कैमरों की रिकार्डिंग में मजदूर संतोष के घर की तरफ जाते नहीं दिखे।