नोएडा सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक के एपेक्स और सियान टावरों (ट्विन टावर) को गिराने में ढाई से चार हजार किलोग्राम विस्फोटक की आवश्यकता पडे़गी। दोनों ही टावर में एक बटन दबाने के साथ ही सात धमाके होंगे और 9 मिनट में पूरा ढांचा मलबे में तब्दील हो जाएगा। पहले 29 मंजिला और बाद में 32 मंजिला इमारत जमींदोज हो जाएगी। एडिफिस कंपनी के पार्टनर उत्कर्ष मेहता और प्रोजेक्ट हेड मयूर मेहता के साथ ही दक्षिण अफ्रीका से आए विस्फोटक विशेषज्ञ केविन स्मिथ ने सोमवार दोपहर नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड सभागार में प्रोजेक्टर के माध्यम से ध्वस्तीकरण प्लान की प्रस्तुति दी। इस दौरान वर्ष 2019 में कोच्चि में 60 मीटर और अमेरिका के वाशिंगटन में 108 मीटर ऊंची इमारत ‘बैंकाक लिसबन’ इमारत को चंद सेकेंड में ध्वस्त किए जाने का वीडियो भी दिखाया गया।
ट्विन टावर: एक बटन दबाते ही होंगे 7 धमाके, 9 मिनट में मलबे में बदल जाएगा पूरा ढांचा, जानिए और क्या-क्या होगा इस दौरान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेहता ने बताया कि वाशिंगटन में गिराई गई बैंकाक लिसबन 108 मीटर ऊंची इमारत थी, जबकि ट्विन टावर 103 मीटर ऊंचे हैं। ‘बैंकाक लिसबन’ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद दोनों ही जगह मलबा अपनी नींव की सीमा के अंदर ही रहा। ऐसे में स्थानीय लोगों को बिलकुल नहीं घबराना चाहिए। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले सेफ्टी नेट तैयार किया जाएगा। इमारत से निकला मलबा ज्यादातर तो बेसमेंट में ही कवर हो जाएगा। कुछ मलबे को भराव वाली जगह में शिफ्ट किया जाएगा। फिर भी कुछ बचता है तो उसे प्राधिकरण के सीएंडडी सेंटर पर भेजा जाएगा।
जल्द ही साफ हो जाएगी धूल
विस्फोट के दौरान धूल का गुबार तो उठेगा, लेकिन आठ से दस मिनट में ही धूल छंट जाएगी। इसके बाद पानी बरसाकर धूल को बैठाने का काम किया जाएगा। ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई के दौरान फायर टेंडर, एंबुलेंस के साथ ही एनडीआरएफ की टीम भी मौजूद रहेगी। उत्कर्ष ने बताया कि पूरी तरह से कंट्रोल ब्लास्ट होगा। आवाज ठीक वैसी होगी, जैसे दिवाली के दौरान आसमान में जाकर आवाज करने वाले पटाखे की होती है।
कंक्रीट के कॉलम में किए जाएंगे सात हजार छेद
ट्विन टावरों के कंक्रीट के कॉलम में सात हजार छेद कर उनमें विस्फोटक लगाए जाएंगे। विस्फोटक ग्राउंड फ्लोर, 1, 2, 6, 10, 14, 18, 22, 26 और 30वीं मंजिल पर लगाए जाएंगे। विस्फोटक लाने के लिए रोजाना दो वाहनों को लगाया जाएगा। इस दौरान तकनीशियनों के अलावा किसी को टावरों में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। ट्विन टावर में लगने वाला विस्फोटक करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर रखा जाएगा।
विस्फोटक लगाने में लगेंगे 12 से 15 दिन
विशेषज्ञों ने बताया कि ट्विन टावर में विस्फोटक लगाने में 12 से 15 दिन का समय लगेगा। विस्फोटक लगाने के पहले ही दिन से इमारत को पुलिस की सुरक्षा से लैस कर दिया जाएगा। इस दौरान इमारत में सिर्फ विशेषज्ञ ही रहेंगे।
चार लेयर पर की जाएगी सुरक्षा
ट्विन टावर के पिलर में विस्फोटक लगाने के बाद पिलर को लोहे के जाल से कवर कर दिया जाएगा। इसके बाद कागज की एक सीट से उसे पैक कर दिया जाएगा। प्रत्येक मंजिल पर हरे रंग के कपडे़ का जाल लगाया जाएगा। ऐसा करने से धमाके के दौरान कंक्रीट का टुकड़ा उछलेगा नहीं और धूल भी कवर हो जाएगी। चौथी लेयर के रूप में पड़ोसी टावर एमरॉल्ड कोर्ट और एटीएस के बीच 30 मीटर ऊंची कंटेनर की दीवार बनाकर मलबे को फैलने से रोकने का काम किया जाएगा।
ध्वस्तीकरण से पहले एक्सप्रेस वे भी होगा बंद
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले आधा घंटे के लिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे को बंद किया जाएगा। टावर के चारों ओर का एरिया भी तीन से पांच घंटे तक सील रहेगा। ध्वस्तीकरण के आधा घंटा बाद भौतिक रूप से यह देखा जाएगा कि कोई विस्फोटक बचा तो नहीं है। एमरॉल्ड कोर्ट, एटीएस और पार्श्वनाथ के लोगों को भी करीब पांच घंटे अपने घरों से दूर रहना होगा।
गैस लाइन को नहीं है कोई खतरा
उत्कर्ष मेहता ने बताया कि ट्विन टावर के पास से गुजर रही गेल की गैस पाइप लाइन को कोई खतरा नहीं है। यह करीब तीन मीटर नीचे जमीन में दबी हुई है। इसके बावजूद सुरक्षा की दृष्टि से पाइपलाइन के आसपास की जमीन को स्टील की प्लेट से कवर किया जाएगा।