अगर सेंसर बोर्ड मेरी फिल्म पर रोक लगा देता तो मैं इसे इंटरनेट पर फ्री में लोगों को दिखवाता, लेकिन किस्मत अच्छी थी कि तमाम अड़चनों का सामना करते हुए इसे पास करवा लिया। यह कहना है फिल्म निर्माता प्रकाश झा का। इस साल 21 जुलाई को रिलीज हुई फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ को लेकर शुक्रवार को प्रकाश झा ने कहा कि समाज में जिस तरह से बदलाव हो रहा है, उसको यह फिल्म बखूबी दर्शा रही है।
... तो इंटरनेट पर फ्री चला देता फिल्म : प्रकाश झा
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21वीं विश्व मेंटल हेल्थ कांग्रेस में सिनेमा और मेंटल हेल्थ सत्र के दौरान प्रकाश झा ने कहा कि अक्सर स्कर्ट पहने लड़की या खुली गर्दन की टॉप पहनने वाली पर पुरुष की निगाहें टिकती हैं। इसे लेकर आमतौर पर ज्यादा पुरुषों की सोच भी एक जैसी रहती है। लेकिन जब उनके पास एक ऐसी कहानी आई, जिसमें लड़की चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग उसे नोटिस करें। उनके लिए ये सबसे बड़ी वजह थी फिल्म बनाने की।
उन्होंने कहा कि बेशक हम कितना भी नेम, फेम के साथ आर्थिक तरक्की क्यों न कर लें लेकिन इन सबमें मानसिक स्वास्थ्य का होना सबसे जरूरी एवं महत्वपूर्ण है। दु:खद तथ्य यह है कि आज का मानव बुलंदियों पर पहुंचने के बावजूद भी तनाव, अवसाद जैसी बीमारियों की गिरफ्त में तेजी से आ रहा है। इसके लिए उन्होंने जीवन संगिनी के मध्य आत्मीयता बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि माता पिता से मिले बाल्यकाल में संस्कार को पालन कर हम तनावमुक्त जीवन यापन कर सकते हैं।
इस मौके पर लेखक, फिल्म निर्देशक एवं मनोचिकित्सक लुसी बेरेसफोर्ड, वरिष्ठ मनोचिकित्सक एवं फिल्म एक्टर मोहन अगासे ने भी अपने अनुभवों को साझा किया। अगासे ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को सामान्य रखने के लिए जरूरी है कि आप जहां हैं बेशक वह कार्यस्थल है या फिर घर या सफर हर जगह अपने आपको उस परिस्थिति के अनुकूल बनाए रखने का प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि सिनेमा और मानसिक स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक हैं। मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. निमेश देशाई ने भी अपने विचार रखे। इसमें दुनिया भर के करीब 300 से अधिक विशेषज्ञ शिरकत कर रहे हैं।