दुनिया के सबसे मारक ‘अपाचे अटैक’ हेलीकॉप्टर भारत पहुंच चुके हैं, जिससे वायुसेना की ताकत और बढ़ेगी। अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने शनिवार को चार एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टर गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर भारतीय वायुसेना को सौंपें। चार साल पहले भारत ने अमेरिका के साथ 22 अपाचे हेलीकॉप्टर का करार किया था। अगले सप्ताह चार और अपाचे हेलीकॉप्टर वायुसेना को मिलेंगे। वहीं, 2022 तक सभी हेलीकॉप्टर वायुसेना के बेड़े में शामिल हो जाएंगे।
भारतीय वायुसेना को मिला सबसे घातक ‘अपाचे’ हेलीकॉप्टर, पठानकोट एयरबेस पर होंगे तैनात
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एएच-64ई अपाचे विश्व के सबसे उन्नत लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में से एक हैं, जिसे अमेरिका सेना इस्तेमाल करती है। यह बेहद कम ऊंचाई से हवाई और जमीनी हमले में सक्षम है। भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अपाचे के बेड़े में शामिल होने से उसकी लड़ाकू क्षमताओं में काफी बढ़ोतरी होगी, क्योंकि इनमें भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बदलाव किया गया है। हिंडन एयरबेस पर अपाचे हेलीकॉप्टरों में कुछ जरूरी उपकरण लगाने के बाद इन्हें पठानकोट एयरबेस पर आधिकारिक तौर पर वायुसेना में शामिल किया जाएगा। अपाचे रूस निर्मित एमआई-35 हेलीकॉप्टर की जगह लेंगे।
रात में हमला करने में सक्षम
अपाचे मल्टी रोल फाइटर हेलीकॉप्टर है। इसे लेजर, इंफ्रारेड व नाइट विजन सिस्टम से लैस किया गया है, जिससे यह अंधेरे में भी दुश्मनों का काम तमाम कर सकता है। वायुसेना ने सितंबर 2015 में अमेरिकी सरकार और बोइंग के साथ अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए करोड़ों डॉलर के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। इसके अतिरिक्त रक्षा मंत्रालय ने बोइंग से 2017 में 4168 करोड़ रुपये के हथियारों के साथ छह हेलीकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दी थी।
अपाचे इस्तेमाल करने वाला भारत 14वां देश
बोइंग ने पूरी दुनिया में 2200 से अधिक अपाचे हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति की है और भारत 14वां देश है, जिसने इसे अपनी वायुसेना के लिए चुना है। अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, इस्राइल, नीदरलैंड्स, सऊदी अरब, जापान और मिस्र की वायुसेना भी इनका इस्तेमाल करती है। एएच-64ई अपाचे ने भारतीय वायुसेना के लिए अपनी पहली सफल उड़ान जुलाई, 2018 में की थी। वायुसेना के पहले दल ने हेलीकॉप्टर उड़ाने का प्रशिक्षण 2018 में अमेरिका में शुरू किया था।
- 365 किमी प्रतिघंटे की अधिकतम रफ्तार से भर सकता है उड़ान
- 16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता
- 30 मिलीमीटर की दो गन से लैस
- 1,200 गोलियां भरी जाती है एक बार में