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वो महिला जिन्होंने विदेश में पहली बार फहराया था भारत का झंडा

Mon, 06 Jan 2020 04:09 PM IST
Mohit Mudgal बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: Mohit Mudgal Updated Mon, 06 Jan 2020 04:09 PM IST
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Bhikaiji Cama, woman who hoisted India flag for the first time in abroad

जब भी हम अपने राष्ट्रध्वज को हवा में लहराते हुए देखते है तो सभी गर्व की अनुभूति जरूर होती होगी। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत का सबसे पहला झंडा कैसा दिखता था? सबसे पहले विदेश में यह कहां फहराया गया? वो कौन था जिसने सबसे पहले विदेशी धरती पर भारत के इस झंडे को फहराया था?  आज हम आपको बताएंगे भारत के उस ध्वज के बारे में जो सबसे पहले विदेशी धरती पर फहराया गया।

Bhikaiji Cama, woman who hoisted India flag for the first time in abroad
Indian Flag
  • भारत की आजादी से चार दशक पहले, साल 1907 में विदेश में पहली बार भारत का झंडा एक औरत ने फहराया था। 46 साल की पारसी महिला भीकाजी कामा ने जर्मनी के टगार्ट में हुई दूसरी 'इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस' में ये झंडा फहराया था।
  • ये भारत के आज के झंडे से अलग, आजादी की लड़ाई के दौरान बनाए गए कई अनौपचारिक झंडों में से एक था। रोहतक एम.डी. विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर बी.डी. यादव ने मैडम कामा पर एक किताब लिखी है।
  • उन्होंने बताया कि उस कांग्रेस में हिस्सा लेनेवाले सभी लोगों के देशों के झंडे हराए गए थे और भारत के लिए ब्रिटेन का झंडा था, उसको नकारते हुए भीकाजी कामा ने भारत का एक झंडा बनाया और वहां फहराया।
Bhikaiji Cama, woman who hoisted India flag for the first time in abroad
  • अपनी किताब, 'मैडम भीकाजी कामा' में प्रो. यादव बताते हैं कि झंडा फहराते हुए भीकाजी ने जबरदस्त भाषण दिया और कहा कि ऐ संसार के कॉमरेड्स, देखो ये भारत का झंडा है, यही भारत के लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, इसे सलाम करो। मैडम कामा को भीकाजी और भिकाई जी, दोनों नाम से जाना जाता था।
  • ये वो वक्त था जब दो साल पहले, साल 1905 में भारत में बंगाल प्रांत का बंटवारा हुआ था, जिसकी वजह से देश में राष्ट्रवाद की लहर दौड़ गई थी।
  • महात्मा गांधी अभी दक्षिण अफ्रीका में ही थे, पर बंटवारे से उमड़े गुस्से में बंगाली हिंदुओं ने 'स्वदेशी' को तरजीह देने के लिए विदेशी कपड़ों का बहिष्कार शुरू कर दिया था।
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Bhikaiji Cama, woman who hoisted India flag for the first time in abroad

सूरज और चांद का मतलब

  • बंगाली लेखक बंकिम चंद्र चैटर्जी की किताब 'आनंदमठ' से निकला गीत 'बंदे मातरम' राष्ट्रवादी आंदोलनकारियों में लोकप्रिय हो गया। भीकाजी कामा द्वारा फहराए झंडे पर भी 'बंदे मातरं' लिखा था। इसमें हरी, पीली और लाल पट्टियां थीं। झंडे में हरी पट्टी पर बने आठ कमल के फूल भारत के आठ प्रांतों को दर्शाते थे।
  • लाल पट्टी पर सूरज और चांद बना था। सूरज हिन्दू धर्म और चांद इस्लाम का प्रतीक था। ये झंडा अब पुणे की केसरी मराठा लाइब्रेरी में प्रदर्शित है।
  • इसके बाद मैडम कामा ने निवा से 'बंदे मातरम' नाम का 'क्रांतिकारी' जर्नल छापना शुरू किया। इसके मास्टहेड पर नाम के साथ उसी झंडे की छवि छापी जाती रही जिसे मैडम कामा ने फहराया था।
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Bhikaiji Cama, woman who hoisted India flag for the first time in abroad
श्यामजी कृष्ण वर्मा - फोटो : फाइल फोटो

1907 में मैडम भीकाजी कामा द्वारा फहराया झंडा

  • भीकाजी पटेल 1861 में बॉम्बे (जो अब मुंबई है) में एक समृद्ध पारसी परिवार में पैदा हुईं। 1885 में उनकी शादी जानेमाने व्यापारी रुस्तमजी कामा से हुई। ब्रितानी हुकूमत को लेकर दोनों के विचार बहुत अलग थे। रुस्तमजी कामा ब्रिटिश सरकार के हिमायती थे और भीकाजी एक मुखर राष्ट्रवादी।

यूरोप में आजादी की अलख

  • 1896 में बॉम्बे में प्लेग की बीमारी फैली और वहां मदद के लिए काम करते-करते भीकाजी कामा खुद बीमार पड़ गईं। इलाज के लिए वो 1902 में लंदन गईं और उसी दौरान क्रांतिकारी नेता श्यामजी कृष्ण वर्मा से मिलीं। श्यामजी कृष्ण वर्मा से मैडम कामा को प्रेरणा मिली। 
  • प्रो. यादव बताते हैं कि भीकाजी उनसे बहुत प्रभावित हुईं और तबीयत ठीक होने के बाद भारत जाने का ख्याल छोड़ वहीं पर अन्य क्रांतिकारियों के साथ भारत की आजादी के लिए अंतर्राष्ट्रीय समर्थन बनाने के काम में जुट गईं। ब्रिटिश सरकार की उन पर पैनी नजर रहती थी। लॉर्ड कर्जन की हत्या के बाद मैडम कामा साल 1909 में पेरिस चली गईं जहां से उन्होंने 'होम रूल लीग' की शुरूआत की।
  • उनका लोकप्रिय नारा था 'भारत आजाद होना चाहिए, भारत एक गणतंत्र होना चाहिए, भारत में एकता होनी चाहिए। तीस साल से ज्यादा तक भीकाजी कामा ने यूरोप और अमेरीका में भाषणों और क्रांतिकारी लेखों के जरिए अपने देश के आजादी के हक की मांग बुलंद की।
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