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Leadership: सफल लीडर बनने के लिए सुनना और समझना है जरूरी, बदलाव को अपनाएं; तभी बनेंगे कामयाब नेतृत्वकर्ता
जेनी फर्नाडीज, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू
Published by: Shahin Praveen
Updated Thu, 02 Apr 2026 03:07 PM IST
सार
Effective Leader: एक सफल लीडर बनने के लिए बदलाव के प्रति सही नजरिया रखना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही सुनने, फीडबैक लेने और दूसरों की भावनाओं को समझने की आदतें विकसित करना नेतृत्व कौशल को मजबूत बनाता है।
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Leader: किसी भी संस्थान में बदलाव लाना लीडर की अहम जिम्मेदारी होती है। मजबूत योजना और स्पष्ट रणनीति के बावजूद बदलाच अक्सर इसलिए असफल हो जाते हैं, क्योंकि लीडर कर्मचारियों की भावनाओं और परेशानियों को समझ नहीं पाते। वे चुप्पी को सहमति मान लेते हैं या सही बातों को नजरअंदाज कर देते हैं। सफल लौडर वही होते हैं. जो अपनी सोच और कर्मचारियों के अनुभव के बीच के अंतर को समझकर उसे कम करने का प्रयास करते हैं।
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समस्या को सही नजर से देखें
बदलाव की रफ्तार धीमी पड़ते ही, लीडर अक्सर कर्मचारियों की नीयत और मेहनत पर सवाल उठाने लगते हैं, जबकि असल कारण कुछ और होता है। यह किसी व्यक्ति की कमजोरी नहीं, बल्कि सिस्टम की कमी होती है। संस्थान लोगों को जिन आधारों पर आगे बढ़ाते हैं, वही कौशल बाद में उनकी भूमिका की आवश्यकताओं से मेल नहीं खाते। इसी वजह से कई लीडर यह समझ नहीं पाते कि उनके फैसलों का टीम पर क्या असर पड़ रहा है।
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अभ्यास से समझ विकसित करें
लोगों की समझने की क्षमता केवल ट्रेनिंग से नहीं, बल्कि अभ्यास और सही फीडबैक से विकसित होती है। हर बातचीत के बाद सामने वाले की भावनाओं और अपनी बात के प्रभाव पर सोचकर, और उसे फीडबैक से मिलाकर, लीडर अपनी समझ को धीरे-धीरे बेहतर बना सकते हैं। इससे उनके निर्णय और संवाद दोनों अधिक प्रभावी हो जाते हैं।
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सिस्टम में करें बदलाव
कई बार केवल व्यक्तिगत सुधार पर्याप्त नहीं होते। ऐसे में सिस्टम को इस तरह बनाना जरूरी होता है, जिससे वास्तविक फीडबैक सीधे सामने आ सके। इसके लिए संगठन में ऐसे माध्यम होने चाहिए, जहां कर्मचारी बिना झिझक अपनी बात रख सकें। अनौपचारिक बातचीत, गुमनाम फीडबैक और विभिन्न स्तरों पर संवाद के माध्यम से लीडर तक सही जानकारी पहुंच सकती है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि टीम वास्तव में क्या सोच रही है।
लोगों को समझने की क्षमता किसी ट्रेनिंग से नहीं आती, बल्कि यह लगातार अभ्यास और सही फीडबैक से विकसित होती है।
संगठन में ऐसे माध्यम बनाने चाहिए, जहां कर्मचारी बिना झिझक अपनी बात रख सकें।
सफल लीडर वही होते हैं, जो सबसे पहले अपनी सोच और कर्मचारियों के वास्तविक अनुभव के बीच के अंतर को पहचानते हैं और उसे कम करने का प्रयास करते हैं।
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समय पर लें सही निर्णय
यह देखना चाहिए कि लीडर के व्यवहार और टीम के अनुभव में सुधार हो रहा है या नहीं। यदि लंबे समय तक कोई सकारात्मक बदलाव नहीं दिखता, तो नेतृत्व में बदलाव करना बेहतर होता है। कई बार यह स्वीकार करना पड़ता है कि कोई व्यक्ति तकनीकी रूप से सक्षम होने के बावजूद नेतृत्व की भूमिका के लिए उपयुक्त नहीं होता।
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