कैंब्रिज विश्वविद्यालय के खगोल विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ग्रह की खोजा है, जहां का वातावरण हमारी धरती जैसा ही हैं। जहां पानी, हाइड्रोजन के साथ ही वो गैसें भी मौजूद हैं जो जीने के लिए जरूरी होती हैं। लेकिन ये ग्रह हमारी पृथ्वी से काफी दूर है। खगोल वैज्ञानिक के अनुसार इस ग्रह का आकार पृथ्वी के आकार से दोगुना भी है। इस ग्रह पर मानव बस्तियां बसाई जा सकती हैं। इस सफलता में कैंब्रिज एक भारतवंशी वैज्ञानक का बहुत बड़ा योगदान रहा।
वैज्ञानिकों की नई खोज, धरती से दोगुने आकार का ग्रह, जहां रह सकते हैं मानव
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इस ग्रह को फिलहाल K2-18B नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि इस ग्रह पर न केवल ऑक्सीजन मौजूद है बल्कि बड़ी मात्रा में द्रव पानी भी मौजूद है। यह ग्रह पृथ्वी से लगभग 124 प्रकाश वर्ष दूर है। जिस कारण से इस पर मानव को बसाने में एक मुश्किल काम है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि K2-18B का आकार पृथ्वी से 2.6 गुना है और इसका वजन पृथ्वी की तुलना में 8.6 गुना अधिक है।
कैंब्रिज एस्ट्रोनॉमनी इंस्टीट्यूट में भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉक्टर निक्कु मधुसूदन की अगुवाई वाली टीम इस ग्रह पर लगातार नजर बनाए हुए है। उनका मानना है कि इस ग्रह के वातावरण में पानी की मौजूदगी का पता चला है। इसके आधार यह कहा जा सकता है कि यहां पर मानव को बसाया जा सकता है। लेकिन इसकी सतह की स्थितियाें के बारे में जानकारी जा रही है।
पानी, हाइड्रोजन बड़ी मात्रा में मौजूद
वैज्ञानिकों का मानना है कि इसे मिनी नेपच्युन भी कहा जा सकता है कि ऐसा लगता है कि ग्रह पर हाइड्रोजन और पानी के अलावा चट्टानें और लौह अयस्क भी भारी मात्रा में मौजूद है।
मीथेन और अमोनिया भी मौजूद
खगोलशास्त्रियों ने इस ग्रह पर दूसरी गैसों और रसायनों का पता लगाया है, जिसमें मीथेन और अमोनिया भी खोजी गई हैं लेकिन इनकी मात्रा अपेक्षाकृत कम हैं। लेकिन ये गैसें जैवकीय प्रक्रिया के संचालन में कितनी सहयोगी साबित होंगी, इसका पता लगाया जाना अभी बाकी है। हालांकि शोधकर्ताओं इस बात की पुष्टि की है कि जिस मात्रा मेें हाइड्रोजन की जरूरत होती है वह यहां पर मौजूद है।
हाकिंग ने कहा था कि पृथ्वी के बाहर तलाशना होगा जीवन
जाने माने मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग ने पहले ही अपने एक शोध में बताया था कि पृथ्वी पर जीवन जीने के लिए जरूरी गैसें और तत्व अगले 100 वर्षों में खत्म हो सकते हैं। साथ ही धरती का ताप भी बढ़ेगा जिससे इस पर रहना मुश्किल हो सकता है। इसलिए जल्दी ही किसी नए ग्रह का पता लगाना जरूरी होगा।
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