{"_id":"580c7c4d4f1c1bcd75bc1927","slug":"success-story-of-mohammad-abdullah","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"बिना पैरों के खेलते हैं फुटबॉल, खेल देख बड़े-बड़े खिलाड़ी भी हो जाते हैं हैरान","category":{"title":"Success Stories","title_hn":"सफलताएं","slug":"success-stories"}}
बिना पैरों के खेलते हैं फुटबॉल, खेल देख बड़े-बड़े खिलाड़ी भी हो जाते हैं हैरान
Sun, 23 Oct 2016 05:38 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 23 Oct 2016 05:38 PM IST
विज्ञापन
1 of 7
- फोटो : Dailymail
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
वो कहते हैं न कि अगर हौसलें हो तो इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता। ऐसा ही कुछ कारनामा कर दिखाया है ढाका के मोहम्मद अबदुल्ला ने। बचपन में ही अपने दोनों पैर गंवा चुके अबदुल्ला बिना पैरों के ही ऐसे फुटबॉल खेलते हैं कि बड़े-गड़े खिलाड़ी भी मात खा जाएं।
2 of 7
वैसे तो इस खेल में पैरों का खास महत्व है लेकिन जब आप इस शख्स का पैरों के बिना खेल देखेंगे तो इसकी तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। जिंदगी ने हमेशा दुख ही दिया। मां बचपन में ही छोड़कर चली गई थी। सौतेली मां का व्यवहार उनके प्रति कुछ अच्छा नहीं था इसलिए घर तक छोड़ना पड़ा।
3 of 7
अब्दुल्ला कई दिनों तक सड़कों पर रहे और भीख मांग कर अपना गुजारा करने लगे। फिर अपनी दादी के पास रहने के लिए चले आए। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 2001 में चलती ट्रेन पकड़ने की कोशिश में फिसल गए और उनका पैर ट्रेन के पहियों के नीचे आ गया। लोगों ने ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती करवा दिया। लेकिन डॉक्टर उनके पैर बचा नहीं पाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 7
घर वालों ने भी उनके बार में जानने की कोशिश नहीं की। जब इलाज पूरा हो गया तो रेल अधिकारियों ने उन्हें अनाथालय छोड़ दिया। वहां उनका दाखिला बैरिसल यूसुफ स्कूल में कर दिया गया। एक दिन वो अनाथालय से भी भाग निकले।
विज्ञापन
5 of 7
भीख मांग कर अपनी जिंदगी काटनी शुरू कर दी। लेकिन ऐसा करना भी उन्हें कुछ रास नहीं आया। उन्होंने अखबार बेचना शुरू कर दिया। जब भी वो लड़कों को सड़क पर फुटबॉल खेलते देखते फुटबाल के प्रति उनके मन में दबा प्यार जाग उठता। कुछ लोगों ने उन्हें एक एनजीओ में भेज दिया जहां उन्हें व्हीलचेयर दिया गया। लेकिन अब्दुल्ला बिना किसी सहारे के चलना चाहते थे।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X