बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार यानी सुपरस्टार अक्षय कुमार के 56वें जन्मदिन पर आज उनकी एक नई फिल्म का एलान हुआ है। वे प्रियदर्शन द्वारा निर्देशित हॉरर-कॉमेडी फिल्म 'भूत बंगला' में नजर आएंगे। अक्षय और प्रदर्शन 14 साल बाद फिर साथ काम करने वाले हैं। हॉरर-कॉमेडी जॉनर की फिल्मों को दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया था है। इसका हालिया उदाहरण 'मुंजा' और 'स्त्री 2' हैं। हॉरर फिल्मों के युग की शुरुआत करने का श्रेय रामसे ब्रदर्स को जाता है। ऐसे में चलिए आज आपको बताते हैं उनके बारे में, जिन्होंने भारत में इस शैली को जन्म दिया।
Ramsay Brothers: रामसे ब्रदर्स की बदौलत हुई भारतीय हॉरर सिनेमा के युग की शुरुआत, भूतिया फिल्में बना रचा इतिहास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
1970 के दशक की शुरुआत में भारतीय सिनेमा एक नए मोड़ पर था। इस समय तक भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में मुख्य रूप से रोमांस, ड्रामा और एक्शन पर ध्यान केंद्रित किया जाता था, लेकिन एक ऐसा परिवार था, जिसने भारतीय सिनेमा की धारा को बदलने का संकल्प लिया। ये परिवार था रामसे ब्रदर्स का, जिसमें सात भाई थे। सबसे बड़े थे तुलसी रामसे, फिर उन भाइयों में श्याम रामसे, गंगू रामसे, कुमार रामसे, केशु रामसे, किरण रामसे और अर्जुन रामसे थे। उन्होंने भारतीय हॉरर फिल्में बनाने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि भारतीय दर्शकों को भी हॉरर फिल्म का एक अनोखा अनुभव मिलना चाहिए, जो पश्चिमी फिल्मों से अलग हो।
रामसे ब्रदर्स ने अपनी फिल्मों में भारतीय लोककथाओं, परंपराओं और मिथकों को शामिल किया। उनकी फिल्में केवल डरावनी नहीं थीं, बल्कि एक विशेष भारतीय छाप भी पेश करती थीं। उन्होंने पुराने किलों, हवेलियों और सुनसान जगहों को फिल्मांकन के लिए चुना और फिल्मों में भूतिया और आत्माओं की कहानियों को जोड़कर दर्शकों को एक नया अनुभव प्रदान किया। सातों भाइयों के काम भी अलग-अलग थे। हॉरर फिल्मों में निर्देशन की कमान तुलसी और श्याम ने संभाली। कहानी और स्क्रीनप्ले का काम कुमार रामसे करते थे। प्रोडक्शन डिजाइन का काम अर्जुन, सिनेमेटोग्राफी का काम गंगू रामसे और केशु रामसे ने म्यूजिक और साउंड का काम किरण रामसे ने संभाला था।
रामसे ब्रदर्स को भी हॉरर फिल्में बनाने का आईडिया बड़े डरावने और दिलचस्प तरीके से आया। दरअसल, उनके परिवार की सदस्य अलीशा प्रीति कृपलानी ने 'घोस्ट इन अवर बैकयार्ड' में जिक्र करते हुए बताया था कि 1983 में एक अजीब घटना हुई थी। श्याम रामसे एक शूटिंग के सिलसिले में महाबलेश्वर गए था। टीम जा चुकी थी और वे शूटिंग खत्म होने के बाद मुंबई लौट रहे थे, तभी एक लड़की ने उनसे लिफ्ट मांगी और उन्होंने भी उन्हें अपनी कार की फ्रंट सीट पर बैठा लिया, लेकिन थोड़ी ही देर में उनके होश गुम हो गए, जब उन्होंने उस लड़की के पैरों की तरह गौर किया। बताया गया कि उस लड़की के पैर उल्टे थे और डर के मारे श्याम ने कार रोकी, जिसके बाद वह लड़की अचानक कार से उतरकर अंधेरे में गायब हो गई। इसके बाद श्याम तेजी से गाड़ी चालते हुए मुंबई आ गए और इसके बाद रामसे ब्रदर्स को हॉरर फिल्में बनाने का आईडिया आया।
रामसे ब्रदर्स के निर्देशन में बनी पहली हॉरर फिल्म थी 1972 में आई 'दो गज जमीन के नीचे', जिसने भारतीय हॉरर सिनेमा की नींव रखी। फिल्म ने दर्शकों को पहली बार एक अद्वितीय और भयानक अनुभव दिया। इसके बाद रामसे ब्रदर्स ने कई सफल हॉरर फिल्में बनाई, जैसे 1977 में आई 'बीवी की भूतिया', 1988 की 'वीराना' और 1989 में रिलीज हुई 'राजा बाबू'। इन फिल्मों ने न केवल भारतीय दर्शकों को डर के नए अनुभव दिए, बल्कि भारतीय हॉरर सिनेमा को एक नई पहचान भी दिलाई।