इस साल की बहुचर्चित फिल्म ‘हमारे बारह’ की मुख्य सहायक निर्देशक अमृषा गौतम उन तमाम युवतियों के लिए एक प्रेरणा हैं जो हिंदी सिनेमा में कुछ कर दिखाने के लिए अपना घर बार छोड़कर मुंबई आती हैं। अमृषा को रायबरेली में रहन वाली उनकी नानी सरयू देवी से काफी प्रेरणा मिली है। अपना काफी वक्त उन्होंने प्रयागराज में गुजारा और यहीं उन्हें पहली बार सिनेमा से प्यार भी हुआ। अमृषा ने ने बतौर स्वतंत्र निर्देशक अपनी पहली फिल्म पूरी कर ली है। उत्तर प्रदेश के शहर रायबरेली के साधारण परिवार की बेटी अमृषा ही हैं इस हफ्ते की ‘अपना अड्डा’ स्टार।
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अमृषा गौतम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
रायबरेली में अपनी नानी सरयू देवी की गोद में पली बढ़ीं अमृषा गौतम को स्नातक होने तक अंदाजा नहीं रहा कि सिनेमा ही उनकी बाकी जिंदगी की धड़कन बनने वाला है। घरवाले उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे। सीपीएमटी (कंबाइंड प्री मेडिकल टेस्ट) में उनके नंबर भी अच्छे आए थे, लेकिन इसी बीच एक फिल्म से प्रयागराज में ही जुड़ने का मौका मिला और उन्हें लगा कि उनका मन तो इसमें खूब लगता है। विज्ञान से कला की तरफ मुड़ीं अमृषा को पहला ढंग का काम फिल्म ‘दीन दयाल एक युग पुरुष’ में सहायक निर्देशक का मिला और उनके जिम्मे था कलाकारों की वेशभूषा का ध्यान रखना। मुंबई आने के बाद काम और संभला। साथ में विज्ञापन फिल्मों का भी काम चल निकला।
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अमृषा गौतम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमृषा बताती हैं, “संगीत से मुझे बहुत प्रेम है और इसी बीच टी सीरीज और जी म्यूजिक कंपनियों के म्यूजिक वीडियोज का काम मिलने लगा और मुझे इसमें आनंद भी खूब आता है। अब भी मैं एक म्यूजिक वीडियो की तैयारी कर रही हूं, जिसके लिए अभिनेत्री अदा शर्मा से बात चल रही है।” सरकारी विज्ञापनों, निजी विज्ञापनों, म्यूजिक वीडियोज में अमृषा के काम की तारीफ हुई और उन्हें तमिल फिल्म ‘रेड रोज’ में वरिष्ठ सहायक निर्देशक का काम मिला और उसके ठीक बाद वह बन गईं फिल्म ‘हमारे बारह’ की मुख्य सहायक निर्देशक।
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अमृषा गौतम, अंकिता द्विवेदी, राहुल बग्गा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘हमारे बारह’ के हीरो राहुल बग्गा और हीरोइन अंकिता द्विवेदी ही अमृषा की बतौर स्वतंत्र निर्देशक पहली फिल्म ‘नाम में क्या रखा है’ के लीड कलाकार हैं। अमृषा कहती हैं, “रायबरेली के मलिकमऊ रोड इलाके से निकलकर मुंबई जैसे विराट शहर में पैर रखने की जगह बनाना ही बहुत चुनौती भरा होता है। लेकिन, मुझे लगातार अच्छे लोगों का मार्गदर्शन मिलता रहा और आज जो कुछ भी मैं बन पाई हूं, उसमें मेरी लगातार मेहनत, हिम्मत न हारने की मेरी जिद और मेरी नानी का आशीर्वाद शामिल है।”
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अमृषा गौतम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इस बातचीत के दौरान अमृषा गौतम जो सबसे बड़ी बात साझा करती हैं, वह ये है कि मुंबई में आने के बाद हर युवक-युवती को मौके के हिसाब से खुद के साथ प्रयोग करने को तैयार रहना चाहिए। वह कहती हैं, “जिद सिर्फ सफल होने की होनी चाहिए और ये भी ध्यान रखना चाहिए कि जिंदगी कई बार आपको ऐसे मौके भी देती है जिनके बारे में आपने सोचा भी नहीं होता है। मसलन अगर मैं अभिनय के लिहाज से मुंबई आई और मौका मुझे निर्देशन में मिला तो मैंने इसे सीखना शुरू कर दिया। अपने स्वभाव को लचीला रखना, आसपास के माहौल के हिसाब से खुद को बदलते रहना और बदलते माहौल के हिसाब से अनुकूलन करते रहना, किसी भी पेशे में कामयाबी की सीढ़ी बन सकती है।”
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