भोजपुरी अदाकारा और गायिका अक्षरा सिंह इस बार छठ पर्व मना रही हैं। अभिनेत्री पहली बार छठ व्रत कर रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जानकारी दी है। वे निजी रूप से हर तैयारी खुद कर रही हैं। एक तरफ अक्षरा के फैंस इस बात से बेहद खुश हैं और उनका हौसला बढ़ा रहे हैं। वहीं, कुछ लोग उन पर सवाल उठा रहे हैं। अक्षरा को सीख दे रहे हैं कि 'हमारे यहां बिना शादी के लड़कियां छठ व्रत नहीं करती हैं'।
Chhath Puja: पहली बार छठ कर रहीं अक्षरा सिंह, यूजर्स ने उठाए सवाल, कहा- हमारे यहां बिना शादी ये व्रत नहीं होता
आज बुधवार 5 नवंबर से महापर्व माने जाने वाले छठ पर्व की शुरुआत हो गई है। इसका समापन 8 नवंबर को होगा। इस बार भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह भी छठ व्रत रख रही हैं। यह उनका पहला व्रत है।
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शुरू की प्रथम छठ व्रत की तैयारी
अक्षरा सिंह ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट साझा की है। इसमें वे अपने प्रथम छठ व्रत के लिए तैयारी कर रही हैं। प्रसाद बनाने के लिए गेहूं धोती और सुखाती दिख रही हैं। इसके साथ कैप्शन लिखा है, 'पहले छठ की शुरुआत'। अक्षरा के इस पोस्ट पर कुछ यूजर्स लिख रहे हैं, 'हमारे यहां बिना शादी के कोई छठ पूजा नहीं करता है। आप बिना शादी के छठ पूजा क्यों कर रही हैं?'
बताईं मन की भावनाएं
एक अन्य पोस्ट में अक्षरा ने लिखा है, 'आज तक देखा था, सुना था इस छठ मां के महान पर्व को। आज जब मैं खुद इस पर्व को एक व्रती बनकर कर रही हूं और छोटे-छोटे नियमों को सीख रही हूं तो कहीं डर, खुशी, उत्साह और जो भाव मैं महसूस कर रही हूं और मेरा दिल कह रहा है जय छठी मईया'।
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इससे पहले अक्षरा सिंह ने एक पोस्ट साझा कर सवाल किया कि छठ पर्व में दउरा पुरुष की क्यों घाट तक पहुंचाते हैं, महिला क्यों नहीं? अक्षरा ने इस पर्व और महिलाओं को लेकर सवाल किया है। अक्षरा ने सवाल उठाया कि महिलाएं छठ का दउरा क्यों नहीं उठा सकती है? उन्होंने लिखा, ''बनऽ न कवन देव कहरीया , दउरा घाटे पहुंचाय' ना जाने कितने साल से छठ का ये पारंपरिक गीत गाया जाता है और जब जब मैं इस गीत कि यह पंक्ति सुनती हूं तो मन में यह ख्याल आता है की जो महिला छठ पूजा के प्रत्येक रस्म को (खरना से समाप्ति तक) इतनी श्रद्धा और मेहनत से तीन दिन उपवास रखकर करती है ……उसी महिला को अपने माथ पे दउरा उठाकर घाट जाने की रस्म क्यों नहीं है?
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सवाल करने वालों को दिया जवाब
अक्षरा सिंह ने एक मीडिया इंटरव्यू में खुद के छठ व्रत करने पर उठे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा, ' मुझे नहीं पता यह व्रत करने का भाव मेरे अंदर कहां से आया। शायद छठी मैया खुद चाह रही होंगी। शायद वे यह भी चाह रही होंगी मैं इस धारणा को तोड़ूं कि सिर्फ शादीशुदा औरतें इस पूजा को कर सकती हैं। सास देगी तो बहू उठाएगी या मां देगी तो बेटी। क्या इतना बड़ा पर्व शादी का मोहताज है?
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