गुजरते साल के सिनेमा में एक खास बात ये देखने को मिली कि इस बार हिंदी सिनेमा की नायिकाओं ने खूब दमखम परदे पर दिखाया। हालांकि, इतना दम इनकी फिल्मों के निर्माता कारोबार के लिहाज से नहीं दिखा सके। कोरोना संक्रमण काल के बाद दोबारा सिनेमा हॉल खुल पाते, उसका इंतजार किए बिना महिला प्रधान तमाम फिल्में इनके निर्माताओं ने सीधे ओटीटी पर बेच दी। ओटीटी पर सीधे रिलीज होने वाली फिल्मों में साल की शुरुआत एक शानदार फिल्म ‘कागज’ से हुई थी लेकन साल का समापन वैसा नही हो पाया। डिज्नी प्लस हॉटस्टार को बिकी निर्देशक आनंद एल रॉय की फिल्म ‘अतरंगी रे’ से दर्शकों को खासी उम्मीदें रहीं लेकिन सारा अली खान बहुत कोशिशें करके भी ‘रांझणा’ की सोनम कपूर बन नहीं पाईं। सारा अली खान फिल्म ‘लव आजकल’ में कार्तिक का करियर डुबाने की पूरी कोशिश कर चुकी हैं। अब बारी धनुष की दिखती है। खैर, ओटीटी का फायदा भी तो है कि जब फिल्म अच्छी न लगे तो तुरंत कुछ और देखना शुरू कर दो। ओटीटी पर सीधे रिलीज हुई जिन फिल्मों को दर्शकों ने इस साल बिना ब्रेक के देखा और खूब देखा, उनमें से 10 बेहतरीन फिल्मों की सूची मैं फिर से संजो लाया हूं। ये वो फिल्में हैं जिन्हें आप सर्दियों की छुट्टी में फिर से बिंज वॉच कर सकते हैं।
2021 Best OTT Films: ये हैं गुजरते साल की 10 बेस्ट ओटीटी हिंदी फिल्में, कृति, विद्या और पंकज टॉप 3 में
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10. शेरशाह
ओटीटी: प्राइम वीडियो
दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले सीरियल ‘परमवीर चक्र’ में अपने शहर के शहीद की कहानी देख फौज में जाने की प्रेरणा पाने वाले विक्रम बत्रा की कहानी कहती इस फिल्म को लोगों ने इस साल खूब देखा। लेकिन, इसकी याद ज्यादा दिनों तक लोगों के जेहन में रही नहीं। वन टाइम वॉच के लिए ठीक रही इस फिल्म की कहानी ऐसी है कि वह देश में ज्यादातर लोगों को पता है। जो कुछ फिल्म में है वह पहले से सबको पता है। विक्रम बत्रा के किरदार में सिद्धार्थ ने खुद को एक अच्छा अभिनेता साबित करने की कोशिश हालांकि पूरी की है। Shershaah Review: सिद्धार्थ की एक और कमजोर फिल्म, देशभक्ति का जज्बा जगाने में नाकाम ‘शेरशाह’
9. रश्मि रॉकेट
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फिल्म ‘रश्मि रॉकेट’ कहानी है एक ऐसी लड़की की जिसके बारे में शुरू से दर्शकों को बताया जाता है कि उसके पड़ोसी उसे छोरी कम और छोरा ज्यादा समझते हैं। टॉम ब्वॉय वाली उसकी हरकतें दिखाई जाती हैं और दिखाया जाता है कि वह कभी रॉकेट की तरह उड़ने वाली धावक रही है। एक फौजी को बचाते समय लगाई गई उसकी दौड़ उसे भारतीय सेना के एक कैप्टन के करीब लाती है जो उसे फिर से ट्रैक पर उतारने की जिद ठान लेता है। अपनी मां से रश्मि का अजीब सा रिश्ता है। वह उसे नाम लेकर भी बुलाती है और दुलारती भी खूब है। खैर, रश्मि फिर से दौड़ना शुरू करती है। सूबे के सारे शूरवीरों को धराशायी करके राष्ट्रीय टीम में शामिल होने का मौका पाती है। Rashmi Rocket Review: फिनिशिंग लाइन तक पहुंचने में कामयाब तापसी की फिल्म, आगे की दौड़ संभालना जरूरी
8. सरदार उधम
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बतौर निर्देशक शूजीत सरकार ने ‘सरदार उधम’ पर फिल्म बनाने का साहसिक काम किया है। इस शख्सीयत पर फिल्म बनाने की पहली कोशिश निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने कोई 50 साल पहले परीक्षित साहनी को लेकर की थी। ‘सरदार उधम’ में रिसर्च, आर्ट डायरेक्शन, सिनेमैटोग्राफी सब उम्दा है लेकिन तकनीकी रूप से बनी इस बेमिसाल फिल्म की पटकथा और इसकी बुनावट में असल समस्या है। विकी कौशल ने अपनी तरफ से सरदार उधम बनने की मेहनत पूरी की है और ये परदे पर दिखती भी है। बस, फिल्म देखते समय दिमाग में बार बार एक ही बात आती रहती है कि इस रोल में अगर वाकई इरफान होते तो फिल्म कैसी होती? Sardar Udham Movie Review: शूजीत की सुस्त फिल्मों का कालचक्र पूरा, लोकप्रिय तराने पर लिखा महाकाव्य
7. द बिग बुल
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अभिषेक बच्चन पर सुपरस्टार बनने का दबाव न रहा होता तो वह ना जाने कब खुद को एक बढ़िया अभिनेता के तौर पर स्थापित कर चुके होते। नाम में बच्चन जुड़ा तो सबने उनमें कलाकार नहीं सुपरस्टार ही देखा। वह अभिनेता अच्छे हैं बशर्ते निर्देशक को उनके अभिनय की सीमाएं पता हो। वह ड्रामा फिल्मों में बढ़िया काम करते हैं। ‘गुरु’, ‘युवा’, ‘बंटी और बबली’, ‘सरकार’, ‘धूम’ और ‘मनमर्जियां’ जैसी फिल्में उनके अभिनय का एक ऐसा ग्राफ खींचती हैं, जिनमें उनको खुद को एक अभिनेता के तौर पर आगे ले जाने का प्रयास दिखता है। इन फिल्मों के बीच तमाम फ्लॉप फिल्में भी हैं, लेकिन अपनी दूसरी पारी में अभिषेक एक बेहतर अभिनेता दिखने लगे हैं। ‘द बिग बुल’ इसकी एक और बानगी है। The Big Bull Review: बतौर अभिनेता अभिषेक का ऐश्वर्य बढ़ाती फिल्म, पढ़िए कहां चूकी और कहां रही इक्कीस