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'निकाह' को न देखने के लिए सिनेमाघरों पर लगवाए गए थे पोस्टर, सुपरहिट होने के बाद वही थिएटर्स रहे 'हाउसफुल'
'अब के बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें, जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें', फिल्म निकाह का ये डायलॉग तो आपने सुना ही होगा। जी हां, हम उसी 'निकाह' फिल्म की बात कर रहे हैं जिसमें सलमा आगा और राज बब्बर की जबरदस्त केमिस्ट्री देखने को मिली थी। सलमा आगा को फिल्म की नायिका नीलोफर का रोल दिया गया। राज बब्बर को उनके प्रेमी हैदर और दीपक पाराशर को नीलोफर के शौहर नवाब वसीम का किरदार मिला। आज इस फिल्म की रिलीज को 38 साल पूरे हो गए हैं।
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निकाह
- फोटो : twitter- @BombayBasanti
24 सितंबर 1982 को रिलीज हुई फिल्म 'निकाह' का नाम काफी खोजबीन और चर्चा के बाद बदल दिया गया था। फिल्म का नाम 'तलाक तलाक तलाक' था लेकिन बाद में विवाद के डर से इसे बदल कर 'निकाह' कर दिया गया। यह फिल्म दर्शकों को काफी पसंद आई और बॉक्स ऑफिस पर भी हिट साबित हुई।
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निकाह
- फोटो : Twitter- @BombayBasanti
निर्माता निर्देशक बीआर चोपड़ा की 'निकाह' तीन तलाक को लेकर बनी एक ऐसी फिल्म थी, जिसमें मुस्लिम महिलाओं के दर्द के विभिन्न पहलुओं को बहुत बारीकी से दिखाया गया था। 'निकाह' फिल्म बनाने में चोपड़ा को कई मुश्किलें आईं। शुरू होने से पहले ही कई लोगों ने अदालत का दरवाजा तक खटकाया लेकिन किसी तरह ये फिल्म पूरी हुई और सफलता के झंडे गाड़ दिए।
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'निकाह' फिल्म
- फोटो : Twitter- @BombayBasanti
पहले दिन ही मुंबई सहित देश के कई सिनेमाघरों में लंबी-लंबी कतारें लग गईं। हालांकि फिल्म रिलीज के दो दिन बाद कुछ मुस्लिम संगठनों ने 'निकाह' को न देखने के लिए मुंबई के कुछ सिनेमाघरों पर पोस्टर भी लगवा दिए थे लेकिन फिल्म की कहानी, डायलॉग और गीतों ने ऐसी धूम मचाई कि अधिकतर थिएटर्स पर 'हाउसफुल' के बोर्ड लग गए थे।
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'निकाह' फिल्म
- फोटो : Twitter- @BombayBasanti
'निकाह' की कहानी को अचला नागर ने लिखा था। इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर के सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखिका सहित कई अन्य पुरस्कार भी मिले। हैदराबाद की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में दिखाया गया कि ओसमानिया यूनिवर्सिटी में पढ़ते हुए शायर मिजाज के हैदर अपने साथ पढ़ रही नीलोफर से प्यार कर बैठता है जबकि नीलोफर की शादी नवाब खानदान के वसीम से हो जाती है। दोनों हनीमून भी मनाते हैं लेकिन कुछ दिन बाद हालात बदलने लगते हैं। शौहर के दिन रात व्यस्त रहने से नीलोफर खुद को अकेला महसूस करती है। एक रात दोनों में झगड़ा होता है और वसीम नीलोफर को तलाक दे देता है। बाद में हैदर और नीलोफर की दोबारा मुलाकात होती है।
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