सब कुछ ठीक रहा होता तो सोमवार का दिन अमिताभ बच्चन ने फिल्म ‘कुर्बानी’ की याद में किए ट्वीट से शुरू किया होता। जी हां, साल 1980 में रिलीज हुई हिंदी फिल्मों में सबसे ज्यादा कमाई का रिकॉर्ड बनाने वाली फिल्म ‘कुर्बानी’ का हीरो बनने का मौका अमिताभ बच्चन ने गंवा दिया था। उनके पास तब छह महीनों तक तारीखें ही नहीं थी। वह ये फिल्म तो करना चाहते थे लेकिन ये भी चाहते थे कि फिरोज खान उनका इंतजार करें। फिरोज खान ऐसा करें, ये सोचना भी गलत है। जिस दौर में देश की सड़कों पर मर्सिडीज नहीं दिखती थी, उन्होंने इस फिल्म में एक मर्सिडीज एक्शन सीन में बर्बाद कर डाली थी। अमिताभ वाला रोल उन्होंने बाद में अपने करीबी दोस्त विनोद खन्ना से कराया और बनाई सुपर डुपर हिट फिल्म ‘कुर्बानी’।
42 years of Qurbani: बिग बी के हाथ से छिटकी ‘कुर्बानी’ की 10 दिलचस्प कहानियां, रिलीज के पूरे हुए 42 साल
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लगानी पड़ीं नोट गिनने की मशीनें
विनोद खन्ना ने फिल्म ‘कुर्बानी’ में अमर का रोल इसके मुंबई वितरण क्षेत्र के अधिकार अपने नाम करवाने के बाद ही किया। लेकिन फिल्म जब रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ दौलत बरसी तब तक विनोद खन्ना ओशो के हो चुके थे। अकेले मुंबई में ये फिल्म तीन महीने तक हाउसफुल चली थी। फिल्म ने बंपर कमाई की और इतनी कमाई की कि फिरोज खान के बेंगलुरु स्थित फार्म हाउस में नोट गिनने के लिए पूरा एक दस्ता अलग से तैनात किया गया था।
के के शुक्ला ने लिखी फिल्म
कभी जावेद अख्तर को अपने घर में पनाह देने वाली राइटर हनी ईरानी की बहन डेजी ईरानी की शादी हुई फिल्म ‘कुर्बानी’ लिखने वाले राइटर के के शुक्ला से। इनका नाम आप 70 और 80 के दशक में रिलीज हुई तमाम सुपरहिट फिल्मों के क्रेडिट्स में देख सकते हैं। के के शुक्ला उत्तर प्रदेश में उन्नाव जिले के ऊगू के बाशिंदे थे और उनके घर में मुंबई जाने के बाद भी एक इंसान के खाने भर का भोजन हर समय बना रखा रहता था। ये अवध के गांवों का बरसों से चला आ रहा नियम है।
शक्ति कपूर को यूं मिला बड़ा मौका
शक्ति कपूर की बांद्रा में एक दिन एक ब्रांड न्यू मर्सिडीज कार से टकरा गई। शक्ति कपूर पूरे तैश में कार वाले को मारने के लिए नीचे उतरे तो देखा कि सामने फिरोज खान खड़े हैं। फिरोज खान वहां से सीधे दफ्तर आए और के के शुक्ला को बुलाकर बोले कि मेरी कार को टक्कर मारने वाले लड़के को तलाश करो, वही फिल्म ‘कुर्बानी’ का विक्रम बनेगा। संयोग देखिए शक्ति कपूर उस दिन के के शुक्ला के घर खाना खाने पहुंच गए और के के शुक्ला से बोले, ‘वह लड़का मैं ही हूं। आज मेरी ही कार फिरोज खान की कार से टकरा गई थी।’ फिरोज खान हिंदी सिनेमा के ऐसे फलदार वृक्ष रहे जिसने पत्थर मारने वालों को भी फल ही दिए।
शक्ति कपूर की पिटाई
बताते हैं कि फिल्म ‘कुर्बानी’ की शूटिंग खत्म होते होते एक बार शक्ति कपूर ने फिरोज खान से मार भी खाई। शक्ति कपूर की आदत है अपने जान पहचान के लोगों से करीबी दिखाने के लिए उनके घर वालों के हाल चाल पूछने की। शक्ति को पता चल चुका था कि फिरोज खान की एक बहन भी है दिलशाद नाम की। तो एक दिन जब फिरोज और शक्ति दोनों नशे में धुत थे, शक्ति कपूर ने पूछ लिया कि दिल्लू कैसी है? फिरोज खान को लगा कि शक्ति कपूर की नीयत में खोट है। उन्होंने शक्ति को ऐसा जबर्दस्त मुक्का चेहरे पर मारा कि शक्ति कपूर जमीन पर चारों खाने चित हो गए।