Web Series Review: ए सिंपल मर्डर
सोनी नेटवर्क इंडिया का ओटीटी एप ‘सोनी लिव’ अपने कंटेंट के चलते लोगों का ध्यान खींचने में कामयाब हो रहा है। इसकी एक सीरीज ‘स्कैम 1992’ इस सीजन की अद्भुत सीरीज रही और अब बारी है ‘ए सिंपल मर्डर’ की। ये सीरीज वैसे तो वे सारे मसाले अपने में समेटे हैं जिसके लिए ओटीटी बदनाम रहा है, लेकिन असल मुद्दा यहां ये है कि इसकी कहानी में जान है। कुछ भी जबर्दस्ती का नहीं है और न ही ये बनावटी लगता है।
A Simple Murder Review: ‘स्कैम 1992’ के बाद सोनी लिव का नया वीकएंड धमाल, बिंचवॉच की परफेक्ट कहानी
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अपने नाम की तरह कहानी इसकी जरूर सिंपल नहीं है। ‘रंगबाज’ बनाने वाले निर्देशक सचिन पाठक को यहां दो शानदार लेखकों अखिलेश और प्रतीक के रूप में अच्छे कंपास मिले हैं। दोनों अपनी अपनी दिशाओं की सुइयां मजबूती से थामे रहते हैं। कुछ भी कहीं से भी न अटकने देते हैं और न ही भटकने। चूहे से शुरू हुआ मसला इतना पेचीदा भी हो सकता है, भला कौन सोच सकता है। लेकिन, लव जिहाद रोकने के लिए कानून बनाने की कोशिशों के दौर में कोई बंदा पूरी सीरीज ही इसी ट्रैक पर छाप देगा, ये भी भला किसने सोचा होगा। लेकिन, ‘ए सिंपल मर्डर’ इस सबके अलावा भी बहुत कुछ है। धर्म पूछे बिना प्रेम कर बैठा एक जोड़ा है, एक पंडित जी हैं जिनका साइड बिजनेस सुपारी चढ़ाना या चढ़वाना नहीं बल्कि ‘सुपारी’ लेना है। पुलिस के दो चंगू मंगू हैं और हैं दो ऐसे कलाकार जिनके अभिनय ने इस सीरीज में जान डाल दी है।
कहानी बता देने से सीरीज देखने का मजा जाता रहेगा लेकिन रिव्यू पढ़ते समय हर पाठक का ये मन तो होता ही है कि आखिर सीरीज है क्या? तो ऐसे कथापिपासुओं के लिए सामान्य ज्ञान ये है कि स्टार्ट अप की दुनिया से दुखी एक पति को अनचाहे में ऐसा काम मिल जाता है जिसे वो ईश्वर का आशीर्वाद समझकर अपना लेता है। बीवी उसकी अपने बॉस से सेट है और बॉस की सेटिंग आगे कहीं और भी चल रही है। पति ने जो काम किस्मत कनेक्शन समझकर ले लिया था, उसको अंजाम देने के चक्कर में पूरा रायता फैल जाता है और ऐसा फैल जाता है कि लाशों का स्कोर बढ़ना शुरू हो जाता है।
असल दिल्ली की पुरानी गलियों में शूट हुई वेब सीरीज ‘ए सिंपल मर्डर’ इस वीकएंड के लिए बिल्कुल सही चुनाव है। बिंजवॉच के लिए और दूसरा कुछ इसकी टक्कर का दिखता भी नहीं है। सीरीज के लेखकों ने इसके किरदारों का आर्क ऐसा बना कर रखा है कि आखिरी मौके तक समझ नहीं आता कि आगे क्या होने वाला है। हां, सीरीज में कहीं कहीं ये लग सकता है कि एक ही बात बार-बार बताई जा रही है। और, ये भी कि कहानी अपने अंजाम से पहुंचने से पहले ही खत्म होती दिख सकती है लेकिन असली एंगल इसके बाद भी कम नहीं है। एक बढ़िया राइटिंग टीम और एक सुलझे निर्देशक का अच्छा काम है, ‘ए सिंपल मर्डर’।
अदाकारी के लिहाज से भी सीरीज के कलाकारों ने कमाल काम किया है। और, इसका असल असर दिखता है वहां जहां सुशांत सिंह और अमित सियाल एक साथ होते हैं। दिल में दबी शायरी और जिगर में सुलगते अरमान दोनों का साथ आना विस्फोटक है। जीशान अयूब को भी अरसे बाद मौका मिला अपना दम दिखाने का और उन्होंने दिखाया भी बहुत खूब है। वेब सीरीज ‘ए सिंपल मर्डर’ के ये ही तीन इक्के हैं, प्रिया आनंद की जगह अगर किसी काबिल अदाकारा को यहां लिया गया होता तो सीरीज सौ फीसदी परफेक्शन के करीब पहुंच सकती थी। पुलिस की तफ्तीश वाले कुछ सीन भी हटाए जा सकते थे और कंडोम पुराण की भी उतनी जरूरत यहां दिखती नहीं है।
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