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Bicchoo Ka Khel Review: एकता ने इस बार उपन्यास से निकाला खेल, मुन्ना भैया का हुआ कॉपी कैट से मेल

Thu, 19 Nov 2020 08:45 PM IST
Mishra Mishra पंकज शुक्ल
पंकज शुक्ल Published by: Mishra Mishra Updated Thu, 19 Nov 2020 08:45 PM IST
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Bicchoo Ka Khel on zee5 Review by Pankaj Shukla divyendu sharma anshul Chauhan ekta kapoor
बिच्छू का खेल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

कलाकार: दिव्येंदु शर्मा, राजेश शर्मा, सैयद जीशान कादरी, अंशुल चौहान और तृष्णा मुखर्जी आदि। 


निर्देशक: आशीष आर शुक्ला
ओटीटी: जी5
रेटिंग: **


या तो उत्तर प्रदेश के नेताओं का रुआब कम हो चला है या फिर हिंदी सिनेमा वालों ने ये मान लिया है कि यूपी है ही ऐसा। अक्षय कुमार और मानुषी छिल्लर को लेकर इन दिनों पृथ्वीराज और संयोगिता की प्रेम कहानी बना रहे निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेदी ने अपनी फिल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ में जिस बनारस से दुनिया का परिचय कराया था, वह अब ‘मिर्जापुर’ और ‘बिच्छू का खेल’ जैसी वेब सीरीज में अपने चरम को प्राप्त हो रहा है। उत्तर प्रदेश टूरिज्म दिन भर ट्वीट कर करके दुनिया को उत्तर प्रदेश की खासियतें बताता रहता है और दिल्ली के पास नई फिल्म सिटी बन पाने से पहले ही लगता है हिंदी सिनेमा वाले उत्तर प्रदेश की परंपरा, प्रतिष्ठा और पहचान एक गालियों वाले प्रदेश की बनाकर रख देंगे।

Bicchoo Ka Khel on zee5 Review by Pankaj Shukla divyendu sharma anshul Chauhan ekta kapoor
बिच्छू का खेल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

ये ठीक है कि सामान्य जनजीवन में गालियां आम बोलचाल का हिस्सा होती हैं। लेकिन, इतनी गालियां तो दोस्त यार भी आपस में नहीं देते। सच यही है कि ओटीटी कंटेंट को सेंसरशिप की जरूरत नहीं है। लेकिन, इसे हकीकत के करीब होने की जरूरत है। सिर्फ चवन्नी क्लास ऑडियंस के हाथों से तालियां बजवा लेने में ही अपनी जीत समझ लेने वाले निर्माताओं को समझना ये भी जरूरी है कि अपराध आधारित सीरीज का प्रशंसक वह तबका भी है जिसने हिंदी के लोकप्रिय साहित्य पर बनी फिल्मों को गुलशन नंदा के समय से देखना शुरू कर दिया था। गुलशन नंदा के उपन्यासों पर तमाम फिल्में बनी। यश चोपड़ा की बतौर फिल्म निर्माता पहली फिल्म ‘दाग’ भी उनके एक उपन्यास पर ही आधारित रही। ‘बिच्छू का खेल’ भी इसी नाम के एक उपन्यास पर आधारित है।

Bicchoo Ka Khel on zee5 Review by Pankaj Shukla divyendu sharma anshul Chauhan ekta kapoor
बिच्छू का खेल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

हिंदी सिनेमा में अपराधकथाओं के उपन्यासों पर फिल्में बनाने का सिलसिला भी काफी पुराना है। शशिलाल नायर ने 1985 में वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यास ‘बहू मांगे इंसाफ’ पर नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी, राकेश रोशन और सुप्रिया पाठक को लेकर फिल्म बनाई थी, ‘बहू की आवाज’। लल्लू जगधर सब बहुत बाद की बातें हैं। एकता कपूर ने काम ये बढ़िया किया कि ओरीजनल राइटर को भी इसका क्रेडिट दिया और नए लेखक भी काम पर लगाए। बस इसमें गालियां की मात्रा कम कर दी जाती तो ये सीरीज इस सीजन की बेहतरीन क्राइम सीरीज हो सकती थी। दिव्येंदु से लोग अब ‘मिर्जापुर’ से आगे बढ़ने की उम्मीदें बांधने लगे हैं। लेकिन, उनको लगता है कि गालियां ही ‘इक्कीस तोपों की सलामी’ देंगी। 37 के हो चुके दिव्येंदु भले कहते हों कि ओटीटी पर सेंसरशिप बेवकूफी भरी बात है। लेकिन, जिस रफ्तार से वह अपनी सीरीज में गालियां देते हैं, लगता नहीं कि ऐसा कोई किरदार उन्होंने असल जीवन में देखा भी होगा।

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Bicchoo Ka Khel on zee5 Review by Pankaj Shukla divyendu sharma anshul Chauhan ekta kapoor
बिच्छू का खेल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

खैर, ‘बिच्छू का खेल’ की जो अच्छी बातें हैं वो ये कि ये सीरीज आपका ज्यादा समय नहीं लेती। छोटे छोटे एपीसोड हैं। फटाफट खत्म होते जाते हैं। ‘तैश’ के उलट जी5 अगर इस सीरीज को फिल्म बनाकर प्रसारित कर दे तो ज्यादा फायदे में रहेगी। सीरीज के तेवर हैं भी फिल्म वाले। कहानी का हीरो अखिल है। पिता उसके जिस दुकान में काम करते हैं उसकी मालकिन से दिल लगाते हैं और जान से हाथ धो बैठते हैं। बीच में एक बाहुबली के कत्ल की भी कहानी है और ये पूरी कहानी अखिल खुद पुलिस अफसर निकुंज को सुना रहा है। फिल्ममेकिंग की भाषा में इस नॉन लीनियर नरेशन कहते हैं जिसमें दर्शक को कहानी आगे पीछे करके सुनाई जाती हैं।

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Bicchoo Ka Khel on zee5 Review by Pankaj Shukla divyendu sharma anshul Chauhan ekta kapoor
बिच्छू का खेल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

कहानी कमजोर नहीं है। बस, आशीष आर शुक्ला का निर्देशन कमजोर है और नंगई पुरजोर है। कहानी में सस्पेंस हैं, लेकिन कहानी कहीं सांस लेने के लिए भी रुकती नहीं है, इस चक्कर में एक्शन का असर जमने नहीं पाता तब तक माठा बनना शुरू हो जाता है। सीरीज का संगीत बीती सदी की याद दिलाने के लिए हैं, लेकिन कर्णप्रिय नहीं बन पाया है। तकनीकी टीम में क्षितिज रॉय ने बढ़िया काम किया है लेकिन अति से उनको भी बचना चाहिए।

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