अभिनेता आरव चौधरी स्टार प्लस के धारावाहिक 'महाभारत' में भीष्म की भूमिका के लिए जाने जाते हैं। मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अभिनेता आरव चौधरी ने 'धूम', 'लक्ष्य' और हाउसफुल 3 जैसी कई फिल्मों में दमदार भूमिकाएं निभाई हैं। अब वह जल्द ही धारावाहिक ‘श्रीमद रामायण’ में दशरथ की भूमिका में नजर आने वाले हैं। आरव चौधरी से अमर उजाला की एक खास बातचीत।
Aarav Chowdhary Interview: मैं गाड़ी का इंतजार कर रहा था, पीछे से बच्चन साब की आवाज आई, गुड मॉर्निंग और फिर...
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फिल्म 'धूम' की कितनी यादें अब भी बाकी हैं?
'धूम' से जुड़ी तो बहुत सारी यादें हैं। मुझे बचपन से ही बाइक चलाने का बहुत शौक था। इस फिल्म में खूब बाइक चलाने का मौका मिला। मेरी बाइक से अच्छी उदय चोपड़ा की येलो कलर की बाइक थी, उनकी बाइक लेकर घूमने के लिए निकल जाता था। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान पहली बार अभिषेक बच्चन के साथ दोस्ती हुई थी। मैंने अमिताभ बच्चन सर के साथ फिल्म 'लक्ष्य' की थी। इस फिल्म की शूटिंग के बाद जब एक पार्टी में बच्चन साहब से मुलाकात हुई, तब उन्होंने अभिषेक बच्चन से मेरा परिचय कराया था। जॉन अब्राहम को तो पहले से ही जानते थे। हमने साथ में मॉडलिंग की है।
'लक्ष्य' में अमिताभ बच्चन से मिलना तो और भी यादगार रहा होगा?
वह सदी के महानायक हैं। मेरे लिए दुनिया के सबसे बड़े अभिनेता वहीं हैं। वह जो करते हैं और कर दिया, वैसा पूरे विश्व में कोई भी अभिनेता नहीं कर पाया। शूटिंग से पहले हमारी मुलाकात बच्चन साहब से फिल्म के प्रोड्यूसर रितेश सिधवानी के ऑफिस के टैरेस पर हुई। वहां रितेश सिधवानी और अपनी पत्नी शिखा के साथ चाय पी रहा था। अचानक बच्चन साहब आए और हमारी मुलाकात हुई। उस दिन हमारी कोई बात नहीं हुई। 'लक्ष्य' की शूटिंग हमें सुबह चार बजे ही निकलना था। सब लोग एक ही होटल में ठहरे हुए थे। मैं होटल के नीचे अपनी गाड़ी का इंतजार कर रहा था, तभी पीछे से आवाज आई 'गुड मॉर्निग'! मैंने पीछे मुड़कर देखा तो बच्चन साहब खड़े थे। बच्चन साहब बोले कि गाड़ी पीछे से आ जाएगी, आप हमारे साथ गाड़ी में चलिए।
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अमिताभ बच्चन के साथ काम करना हर किसी के लिए एक अनुभव होता है, अभिनय के अलावा उनकी शख्सीयत की भी लोग तारीफें करते हैं, आपके पास भी है ऐसा कोई किस्सा?
जब फिल्म ‘लक्ष्य’ की शूटिंग खत्म हो गई तो हम लोग फोटो खींच रहे थे। बच्चन साहब दूर से देख रहे थे। फिर वह अपना कैमरा लेकर आए और बोले कि मैं फोटो खीचता हूं। शूटिंग के बाद हमलोग मुंबई आ गए, एक दिन बच्चन साहब ने अपने स्टाफ से वे सारे खीचे हुए फोटो मेरे घर पर भिजवाए। और, साथ में लिखा, जैसा मैंने वादा किया था, फोटो भेज रहा हूं। मेरे जीवन की वे बहुत ही मूल्यवान फोटो हैं, जिन्हें बच्चन साहब ने अपने हाथ से खींचा।
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अच्छा, मॉडलिंग से एक्टिंग की तरफ रुझान कैसे हुआ?
पांचवी में कक्षा में था, तब पहला नाटक किया था। तब मुझे ऐसा लगा था कि ठीक कर रहा हूं। जयपुर में मेरे पिता महेंद्र पाल सिंह कलेक्टर थे और मेरी मां सुशीला देवी को फिल्में देखने का बहुत शौक था। मैं बहुत छोटा था, तब से थियेटर में उनके साथ फिल्में देखने जाने लगा था। परदे पर घोड़े, हाथी दौड़ते हुए देखकर मुझे लगता था कि यह सब कैसे हो रहा है? मैंने जयपुर में थियेटर करना शुरू कर दिया। मुझे लगा कि एक्टर बनना है तो काम आना चाहिए। तीन चार साल तक थियेटर किया फिर मुंबई आ गया।
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