70 और 80 के दशक में जीवन का नाम फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर विलेन में गिना जाता था। आज जीवन की डेथ एनिवर्सरी है। साल 1915 में कश्मीर में जन्में जीवन का असली नाम ओंकार नाथ धार था। वो बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे। जीवन का परिवार काफी बड़ा था। उनके 24 भाई बहन थे। जीवन के जन्म के साथ ही उनकी मां का निधन हो गया था। जब जीवन 3 साल के थे तब उन्होंने अपने पिता को खो दिया। 10 जून 1987 को जीवन इस दुनिया को छोड़कर हमेशा के लिए चले गए।
जीवन ऐसे परिवार से थे जहां एक्टिंग के लिए उन्हें इजाजत नहीं मिली थी। इसलिए जीवन 18 साल की उम्र में घर से भागकर मुंबई आ गए। जब वो मुंबई आए तो उनकी जेब में सिर्फ 26 रुपए थे। करियर के शुरुआती दिनों में जीवन को काफी स्ट्रगल करना पड़ा।
उन्हें नौकरी की जरूरत थी इसलिए वो एक स्टूडियो में काम करने लगे। ये स्टूडियो मोहनलाल सिन्हा का था। मोहन लाल उस समय के जाने-माने डायरेक्टर हुआ करते थे। जब मोहनलाल को पता चला कि जीवन एक्टिंग करना चाहते हैं तो उन्होंने अपनी फिल्म 'फैशनेबल इंडिया' में उन्हें रोल दिया।
इसके बाद जीवन को एक के बाद एक कई फिल्मों में काम मिला। जीवन ने अलग-अलग भाषाओं की करीब 60 फिल्मों में नारद मुनि का किरदार निभाया। 50 के दशक में बनी हर धार्मिक फिल्म में उन्होंने नारद का रोल किया। जीवन को पहचान उस समय मिली जब 1935 में उन्होंने फिल्म 'रोमांटिक इंडिया' में काम किया।
इसके बाद जीवन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जीवन की 'अफसाना', 'स्टेशन मास्टर', 'अमर अकबर एंथनी' और 'धर्म-वीर' यादगार फिल्मों में से एक हैं। उन्होंने नागिन, शबनम, हीर-रांझा, जॉनी मेरा नाम, कानून, सुरक्षा, लावारिस, आदि फिल्मों में भी अहम भूमिकाएं निभाई।जीवन अपने करियर के शुरुआती दौर में ही जान गए थे कि उनका चेहरा हीरो लायक नहीं है। इसलिए उन्होंने खलनायकी में हाथ आजमाया और सफल भी हुए।