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Apna Adda 04: अमेठी के सचिन यूं बने अदाकारी के बागी, मुंबई आने के 13 दिन बाद ही हो गया डेब्यू

Wed, 24 Jan 2024 01:46 PM IST
आकांक्षा गुप्ता अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: आकांक्षा गुप्ता Updated Wed, 24 Jan 2024 01:46 PM IST
सार

कवि रमाशंकर यादव का पेननेम विद्रोही है। वह अपनी कविताओं में विद्रोह की बात करते है। उन्होंने अपनी कविता 'नई खेती' में लिखा, आज आसमान में या तो धान उगेगा या जमीन पर आसमान आएगा।

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Actor Sachin Vidrohi from shares his journey in Bollywood in apna adda series
सचिन विद्रोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

मुंबई में रहकर बरसों से मनोरंजन जगत में संघर्ष करके खुद को चमकाने की कोशिशों में लगे हुनरमंदों तक पहुंचने की एक कोशिश है ‘अमर उजाला’ की मुंबई टीम का प्रयास, ‘अपना अड्डा’। ये आयोजन महीने के किसी शनिवार को हुनरमंदों की बस्तियों के आसपास होता है और इसमें संघर्ष के जरिये अपनी पहचान बनाने में सफल हो रहे कलाकार अपनी वे कहानियां सुनाते हैं, जो दूसरों के लिए प्रेरणादायक हो सकती है। ‘अपना अड्डा’ सीरीज की चौथी कड़ी में इस बार उत्तर प्रदेश में अमेठी जिले के सराय कंधा गांव से मुंबई आए सचिन विद्रोही की बारी है। सचिन की पढ़ाई लिखाई दिल्ली में हुई। उनके पिता विनोद कुमार श्रीवास्तव सिविल इंजीनियर है। घर वाले चाहते थे कि सचिन भी इंजीनियर बनें लेकिन वह बने विद्रोही, कैसे? आइए जानते हैं..

Actor Sachin Vidrohi from shares his journey in Bollywood in apna adda series
सचिन विद्रोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आप सचिन श्रीवास्तव से सचिन विद्रोही कैसे बन गए?

कवि रमाशंकर यादव का पेननेम विद्रोही है। वह अपनी कविताओं में विद्रोह की बात करते है। उन्होंने अपनी कविता 'नई खेती' में लिखा, आज आसमान में या तो धान उगेगा या जमीन पर आसमान आएगा। ठीक से हो सकता याद न हो लेकिन कुछ ऐसा ही लिखा था। यूट्यूब पर उनके बहुत सारे वीडियो देखे। उनके कहने के तरीके में कहीं ना कहीं विद्रोह झलकता है। उनके इस कथन ने मुझे काफी प्रभावित किया और बस मैं बन गया सचिन श्रीवास्तव से सचिन विद्रोही।

Actor Sachin Vidrohi from shares his journey in Bollywood in apna adda series
सचिन विद्रोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अभिनेता बनने की पहली पायदान क्या रही?

ये उन दिनों की बात है जब मैं कॉलेज में था। हम लोगों को अपने आप कुछ बनाकर उसे मंचित करने की जिम्मेदारी दी हई। हमने तीन लोगों का ग्रुप बनाया और तीन मिनट का छोटा सा नाटक पर्यावरण पर किया। हमारे अध्यापक एस पी भरतवाल को वह नाटक बहुत पसंद आया। उन्होंने बताया कि अगर किसी को ड्रामा में दिलचस्पी है तो मंडी हाउस जाकर नाटक देख सकता है। मंडी हाउस जाकर हम नाटक देखते थे तो हमारे ट्यूशन छूटने लगे। हमें लगा कि मां बाप हमारी पढ़ाई पर पैसे खर्च कर रहे हैं और हम नाटक देख रहे है। एक दो नाटक देखने के बाद फिर नहीं गए। 

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Actor Sachin Vidrohi from shares his journey in Bollywood in apna adda series
सचिन विद्रोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

उसके बाद?

12वीं के बाद जब कॉलेज में आए तो वहां देखा कि हर लड़का पढ़ाई के पीछे पागल है।  उसी समय एक ड्रैम सो (ड्रामेटिक सोसायटी) के ऑडिशन चल रहे थे। मेरे एक दोस्त ने कहा कि चलकर ऑडिशन देते है, वह पहले ही राउंड में रिजेक्ट हो गया और मैं  तन राउंड के ऑडिशन के बाद बाहर हो गया। दूसरे साल भी ड्रैम सो में ओपन ऑडिशन चल रहे थे, उसने उन लोगो को बुलाया जाता है जो तीसरे राउंड तक पास हुए थे। इस बार मेरा चयन हो गया और मुझे 'डीलक्स कटिंग सैलून' नाटक में काम करने का मौका मिला। उस नाटक को करने के बाद लगा कि एक्टिंग कर सकते हैं। चौथे साल मैं अपनी ड्रामेटिक सोसायटी का  प्रेसिडेंट भी बना। यह सब चीजें 2013 से लेकर 2017 चलती रहीं। 

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Actor Sachin Vidrohi from shares his journey in Bollywood in apna adda series
सचिन विद्रोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

मतलब, थियेटर के साथ साथ पढ़ाई भी चलती रही?

जी, जिस दिन इंजीनियरिंग का फाइनल एग्जाम दिया। पापा ने कहा कि चलो अब ट्रेनिंग शुरू करो। हमें तो लग रहा था कि थियेटर ही करना है। पापा कहां जाने को बोल रहे हैं। मैने पापा से कहा कि दो साल का समय मुझे दे दें। अगर एक्टिंग में कुछ नहीं हुआ तो सिविल इंजीनियरिंग की जॉब कर लेंगे। मैंने कई लोगों को मैसेज किया कि मेरे एग्जाम खत्म हो गए है। अगर कोई काम हो तो बताइए, उनमें से कुलजीत का जवाब आया कि आ जाओ। उन्होंने कहा कि अभी एक्टिंग में कोई जगह खाली नहीं है, वर्कशॉप में असिस्ट कर सकते हो। कुछ दिनों तक असिस्ट किया। तीन साल तक थियेटर किया। 2017 से लेकर 2020 तक वहां नाटक किए। मैंने वहां आखिरी नाटक ‘आषाढ़ का एक दिन’ किया।

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