एक्ट्रेस से सांसद बनीं नुसरत जहां (Nusrat Jahan) लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। नुसरत पर देवबंद के धर्मगुरुओं ने फतवा जारी कर दिया था। उनका कहना है कि मुस्लिम लड़कियों को सिर्फ मुस्लिम लड़कों से ही निकाह करना चाहिए। इस बीच नुसरत जहां से जुड़ी एक और जानकारी आई है। नुसरत को अंतरराष्ट्रीय संस्था इंस्कॉन ने भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में बतौर मुख्य अतिथि बनने का निमंत्रण भेजा है।
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Nusrat Jahan
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भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 4 जुलाई से शुरू हो रही है। कहा जा रहा है कि इस रथ यात्रा की शुरुआत पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करेंगी। नुसरत जहां के मुख्य अतिथि बनाए जाने पर इस्कॉन के प्रवक्ता का बयान भी आ गया है। प्रवक्ता ने कहा- 'हम सभी धर्मों को मानने वाले लोग हैं। हमने देखा है कि नुसरत जहां के विचार हमारे विचारों से मिलते हैं।'
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मिमि चक्रवर्ती और नुसरत जहां लोकसभा में
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प्रवक्ता ने आगे कहा- 'वह भी हमारी तरह सभी धर्मों का आदर करती हैं। ऐसे में एक नए राजनेता के रूप में वह निश्चित ही आज के युवाओं को अपने विचारों से प्रभावित करेंगी। इसीलिए उन्हें रथयात्रा में शामिल होने का न्यौता भेजा गया है।' जहां एक ओर देवबंद के धर्मगुरुओं ने नुसरत के खिलाफ फतवा जारी किया तो वहीं फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने शादी को वैध नहीं माना।
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Nusrat Jahan
- फोटो : instagram
शाही इमाम ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा- 'मुझे नहीं पता फतवे में क्या लिखा है लेकिन इस्लाम सिंदूर की अनुमति नहीं देता है। यह इस्लाम की संस्कृति नहीं है, यह शादी नहीं बल्कि दिखावे का रिश्ता है। मुसलमान और जैन दोनों इसे विवाह नहीं मानेंगे। अब वह ना तो मुसलमान है और ना ही जैन। उसने बड़ा अपराध किया है, ऐसा नहीं करना चाहिए था।' आपको बता दें, नुसरत जहां को लेकर बवाल उस वक्त शुरू हुआ था जब वह संसद में शपथ लेने गई थीं। नुसरत संसद में मांग में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र और साड़ी पहने हुई थीं। जिसके बाद देवबंद के धर्मगुरुओं फतवा जारी कर दिया।
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Nusrat Jahan
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अपने ट्विटर अकाउंट पर नुसरत जहां ने जवाब में लिखा, 'मैं पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करती हूं, जो जाति, धर्म और पंथ की सीमाओं से परे है। जहां तक मेरी बात है तो मैं सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करती हूं। मैं अब भी मुस्लिम हूं। उन लोगों को इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहिए कि मैं क्या पहनूं और क्या नहीं। आपका विश्वास पहनावे से परे होता है। सभी धर्मों के मूल्यवान सिद्धांतों में विश्वास करने और उन्हें मानना कहीं ज्यादा बड़ी बात है।'