फिल्म 'टोटल धमाल' में डेढ़ सौ करोड़ रुपये से ज्यादा कमाई करके गुड्डू इस बार आशीष बनकर लौट आया है। अब वह कह रहा है, दे दे प्यार दे। आज रिलीज हो रही फिल्म दे दे प्यार दे में आशीष बने अजय देवगन से एक खास मुलाकात।
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28 साल से एक्शन और 22 साल से कॉमेडी, फिर भी आप पर एक्शन हीरो की इमेज कुछ ज्यादा मजबूती से चिपकी दिखती है, इसकी कोई तो वजह होगी?
मुझे लगता है, ये एक्शन हीरो वाला तमगा लोगों का ईजाद किया हुआ है। मैने तो कभी सोचा ही नहीं कि किसी किरदार को कैसे करूंगा। मैं बहुत ज्यादा मेथड एक्टिंग में विश्वास नहीं रखता और ना ही मैं कर सकता हूं। ऐसा नहीं कि मैं उस तरीके को गलत कह रहा हूं, लेकिन सबका अपना अलग तरीका होता है। मुझे लगता है जब मैं मेथड एक्टिंग करता हूं, तो बहुत ही ज्यादा मैकेनिकल हो जाता हूं।'
तो कभी ऐसा भी लगा कि नहीं ये किरदार बिल्कुल वैसा है, जैसा मैं चाहता हूं?
किसी कलाकार के लिए ऐसा कुछ नहीं होता। कोई रोल आसान या कोई मुश्किल हो ऐसा भी नहीं है। अगर कोई ऐसा कहता है तो फिर वह कलाकार ही नहीं है। जब आप किरदार के बारे में इस तरह सोचने लगते हैं तो फिर आप कलाकार नहीं रह जाते। ऐसा कोई भी किरदार नहीं है जो एक अच्छा कलाकार न कर पाए।
आप 50 के हो चुके हैं और फिल्म दे दे प्यार दे में आपकी हीरोइन रकुलप्रीत सिर्फ 28 की हैं। क्या कहेंगे पीढ़ियों के अंतर वाले इस प्यार के बारे में?
फिल्म में तब्बू भी हैं। तब्बू के साथ तो मैंने काफी फिल्मों में काम किया है। वह बहुत ही सुलझी हुई कलाकार हैं। रही बात रकुल की तो उसकी सिनेमा की समझदारी बहुत अच्छी है। उसे सब पहले से पता होता है फिर भी कुछ नया मिले तो वह सीखने से चूकती नहीं हैं। रही बात हमारे किरदारों के बीच प्यार की तो ये हमारे बीच की एक दिलचस्प और मनोरंजक कहानी है। मुझे पूरा यकीन है कि गर्मियों की छुट्टियों में एक मस्ती भरी फिल्म देखने की चाहत रखने वाले लोगों को ये रिश्ता जरूर पसंद आएगा।
लेकिन, सुना है आपके घर में मामला थोड़ा ज्यादा टाइट रहता है। किसकी तरफ से सबसे पहले रिएक्शन आता है?
हमारा घर फिल्म समीक्षकों की बस्ती है। कुछ अच्छा लगे तो आराम से बोलते हैं लेकिन कुछ पसंद न आए तो तुरंत रिएक्शन आता है। बच्चों का भी और काजोल का भी।