बॉलीवुड में कई सालों से नेपोटिज्म (भाई- भतीजावाद) का मुद्दा गर्माया हुआ है। बीच- बीच में इस मुद्दे पर बहस होती और फिर ये शांत पड़ जाता है। लेकिन बीते दिनों अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद एक बार फिर से नेपोटिज्म पर बड़ी बहस शुरू हो गई है। कई बड़े कलाकारों के साथ लोग इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इस बीच भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह भी इस बहस में कूद पड़ी हैं और उन्होंने इसे लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
'मेरे सामने भी खुदकुशी वाले हालात पैदा किए गए', सुशांत की मौत के बाद अक्षरा सिंह ने किया खुलासा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अक्षरा सिंह ने एक वीडियो साझा कर कहा है कि स्टार किड्स को इंडस्ट्री में आने का मौका आसानी से मिल जाता है। जो कलाकार बनना चाहते हैं, प्रतिभाशाली हैं, ऐसे सभी लोगों को मौका मिलना चाहिए। स्टार किड्स को भी संघर्ष से गुजरना चाहिए। उन्हें भी ऑडिशन देने चाहिए।
अक्षरा ने कहा कि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में गुटबाजी बहुत ज्यादा है। उन्होंने कहा, 'जब मैं यहां नई नई आई थी तो अगर मैं किसी और हीरो के साथ काम करती थी तो दूसरा हीरो मेरा साथ काम करने से मना कर देता था। तब कहा जाता था कि ये उस गुट की हीरोइन है। मुझे बहुत सारी फिल्मों से निकाला गया। सारी फिल्म इंडस्ट्री एक तरफ हो गई थी।'
अक्षरा ने आगे कहा, 'मेरे सामने ऐसे हालात बना दिए कि मैं सुसाइड करने की स्थिति में पहुंच गई। उस वक्त मेरा किसी ने साथ नहीं दिया। मैं बहुत मुश्किलों से गुजर रही थी। जब आप जिंदा होते हैं तो आपके पास कोई नहीं आता। लेकिन मरने पर लोग मोमबत्ती लेकर निकल पड़ते हैं। मैं आज भी लड़ रही हूं।'
बता दें कि बीते दिनों अक्षरा सिंह ने सुशांत के घर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। इसके साथ ही उन्होंने सुशांत के पिता केके सिंह से मुलाकात की थी। इस दौरान अक्षरा की आंखें नम थीं। अक्षरा ने कहा था कि एक बहुत अच्छा इंसान चला गया। सुशांत को खोने का गम हर स्टार को है।
सुशांत की मौत के बाद जरीन खान ने पूछा, 'अपनी काबिलियत समझाने के लिए क्यों मरना पड़ता है?'