हिंदी सिनेमा संगीत में सुरों की शहजादी अलका याग्निक को माना जाता है। महज छह साल की उम्र से ही आकाशवाणी के लिए गाना शुरू करने वाली अलका रेडियो से चिपककर लता मंगेशकर के गाने सुनतीं और एकलव्य की तरह उनके गानों से सुर साधना करतीं। 90 के दशक की सबसे बेहतरीन अदाकाराओं रानी मुखर्जी, जूही चावला, काजोल आदि के करियर को आसमान पर पहुंचाने में अलका की आवाज का बहुत बड़ा योगदान रहा है। अलका को अब तक सात फिल्मफेयर और दो राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका। कोरोना के इस माहौल में शुक्रवार को मनाए जा रहे उनके जन्मदिन के मौके पर ये 10 गाने आपको घर पर भी अकेला नहीं महसूस होने देंगे।
कोरोना की दहशत से अलका याग्निक के ये 10 गाने दिलाएंगे निजात, बर्थडे पर सुनिए अमर उजाला गीतमाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गीत : एक दो तीन
फिल्म : तेजाब (1988)
गीतकार जावेद अख्तर के लिखे इस गाने में अलका याग्निक ने पहली बार में ही जान डाल दी थी। ये उस वक्त की बात है जब गायकों को लाइव रिकॉर्डिंग करनी पड़ती थी। एक इंटरव्यू में अलका ने बताया कि जिस वक्त उन्होंने इस गाने को रिकॉर्ड किया, उस वक्त उन्हें बुखार था और गला भी खराब था। लेकिन जब लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का संगीत बजा तो अलका ने वन टेक में ही पूरा गाना गा डाला था। इसके लिए अलका को पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। यहां देखें ये पूरा गाना -
गीत : चोली के पीछे
फिल्म : खलनायक (1993)
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत से सजा यह गाना हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक उदहारण के रूप में सामने आया। इससे पहले ऐसा कामुक गाना हिंदी सिनेमा में कभी नहीं सुना गया था। आनंद बक्शी के लिखे इस गीत के बोलों ने तब विवाद पैदा कर दिया था। अलका ने यह गाना इला अरुण के साथ मिलकर गाया है। इसके लिए अलका और इला को संयुक्त रूप से फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यहां देखें ये पूरा गाना -
गीत : घूंघट की आड़ से
फिल्म : हम हैं राही प्यार के (1993)
अभिनेता आमिर खान और जूही चावला पर फिल्माया गया यह गाना हर पवित्र प्रेमी युगल को अपनी ओर आकर्षित करता है। समीर के लिखे इस गाने को अपनी आवाज देकर अलका ने इसे अमर बना दिया। संगीत निर्देशक नदीम-श्रवण के साथ इस गीत में अलका याग्निक का तालमेल सुनते ही बनता है। इस गीत के लिए अलका को भारत सरकार ने राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा। यहां देखें ये पूरा गाना -
गीत : मेरी महबूबा
फिल्म : परदेस (1997)
अपने साथी कुमार सानू के साथ मिलकर अलका ने इस गाने को गाकर प्रेमियों को प्रेम करने का नया बहाना दे दिया। अपनी महबूबा के इंतजार में गाना गाते शाहरुख खान को देखकर उस समय के युवा अपने आप को शाहरुख खान समझने लगे थे। आनंद बक्शी के लिखे इस बेहतरीन गाने को नदीम श्रवण ने अपना म्यूजिक दिया। और अलका ने इसे अपनी आवाज देकर इसमें चार चांद लगा दिए। इस शानदार गाने के लिए अलका को फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजा गया। यहां देखें ये पूरा गाना -