अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) ने अब तक के करियर में हिंदी सिनेमा को एक से बढ़ कर एक बेहतरीन फिल्में दी हैं। 1983 में रिलीज हुई 'कुली' भी उन्हीं फिल्मों में से एक थी। इस फिल्म को एक बुरी घटना के तौर पर भी याद किया जाता है। दरअसल कुली के सेट पर शूटिंग के दौरान पुनीत इस्सर ने जब अमिताभ बच्चन को घूसा मारा तो किसी को नहीं पता था एक सीन फिल्माने की अमिताभ बच्चन को क्या कीमत चुकानी पड़ेगी।
जब मौत के मुंह में पहुंच गए थे अमिताभ, 38 साल पहले हुए हादसे की वजह से ICU में ऐसी हो गई थी हालत
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सौम्य बंदोपाध्याय ने अपनी किताब 'अमिताभ बच्चन' में कुली के दौरान हुए हादसे का जिक्र किया है। अमिताभ सहित सभी को ये चोट मामूली लग रही थी, क्योंकि खून की एक बूंद भी नहीं निकली थी। कुली की शूटिंग के दौरान चोट लगने के बाद से ही अमिताभ बच्चन एक गंभीर और संवेदनशील दौर से गुजर रहे थे। मामला सिर्फ आंत के फट जाने तक नहीं रह गया था। उन्हें निमोनिया और पीलिया ने भी जकड़ लिया था।
पूरे शरीर में कई मशीनें लगी थीं और देश अपने सुपरस्टार की सलामती की दुआ कर रहा था। एक शनिवार को उन्हें चोट लगी थी और दूसरे शनिवार को वह ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती हुए, बीच के इन आठ दिनों में दो ऑपरेशन हुए। अमिताभ बच्चन को एक बार फिर उन दिनों की याद आई है और इसका जिक्र उन्होंने अपने ब्लॉग (बोल बच्चन) पर किया है।
अमिताभ हादसे के बाद आईसीयू के दिनों के बारे में लिखते हैं, 'मेरे गले में ऐसा उपकरण लगा था जिससे बात करना तो दूर, हिलना-डुलना या हाथ चलाना तक मुश्किल हो गया था। मुझे अपनी स्थिति से चिढ़ होती थी। मैं इसका समाधान चाहता था, मैं अचेत था। मेरे गले पर आज भी वो निशान रह गया है। उन दिनों गर्दन काट कर उसमें जीवन रक्षक उपकरणों को डाला गया था।'
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अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में लिखा है, 'इस मशीन के जरिए आप सांस ले सकते थे। जब तक वो गले में है आप कुछ बोल नहीं सकते थे। जब मैं कुछ कहने की हालत में होता, तो मुझे या तो इशारा करना था या सिर्फ एक कागज ढूंढना होता था। ताकि मैं अपने कांपते हुए हाथों से कुछ लिख सकूं। ज्यादातर टूटी हुई बंगाली में जया से बात करते हुए उनसे मुझे पानी पिलाने के लिए कहा था। बंगाली में इसलिए लिखा था क्योंकि डॉक्टरों और नर्सों ने पानी के लिए मना किया था। ये भाषा उनको समझ नहीं आती। हालांकि वो लोग पता लगा लेते थे।'