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वो 15 एक्टर, जो परदे पर खून बहाकर बने बड़े स्टार, खूब तालियां बजीं और खूब पैसे बरसे
Sun, 02 Jun 2019 02:40 PM IST
anand anand
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: anand anand
Updated Sun, 02 Jun 2019 02:40 PM IST
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bollywood actor play Underworld don role
- फोटो : amar ujala
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रवींद्र दुबे
फाइल फोटो
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अमिताभ बच्चन, दीवार
चार दशक से ज्यादा समय पहले, पटकथा लेखक सलीम जावेद की जोड़ी ने ‘दीवार’ जैसी फिल्मों के जरिये हिंदी फिल्मों में डॉन या गिरोह के सरगना के जीवन को जिस तरह महिमा मंडित किया है, उससे फिल्म निर्माता बॉक्स ऑफिस पर इस थीम के सफल होने के प्रति आश्वस्त हो गए और ऐसी फिल्में बहुतायत से बनने लगीं। या यूं भी कहा जा सकता है कि एक तरह से गैंगस्टर फिल्मों बॉक्स ऑफिस पर सफलता की गारंटी हो गईं। कला तो कला है। वह हमेशा जिंदगी की नकल करती है।
अंडरवर्ल्ड जब समाज का एक अभिन्न अंग हो गया, तो उसका प्रतिबिंब फिल्मों में भी झलकने लगा। जिस फिल्म ने अमिताभ बच्चन को महानायक बनाया, उसी का उदाहरण लें। ‘दीवार’ फिल्म में अमिताभ बच्चन का किरदार सत्तर के दशक में पनपे माफिया डॉन हाजी मिर्जा मस्तान से प्रेरित है। वह शुरू में मुम्बई की गोदी पर कुली का काम करता था और वहां से उठकर सोने चांदी की तस्करी करने लगा। यह और बात है कि मस्तान का अंत फिल्म के नायक जैसा नहीं हुआ। फिल्मी पंडितों का कहना है कि फिल्मों में अंडरवर्ल्ड के चरित्रों का प्रवेश इसी फिल्म से हुआ। इसके बाद तो यह सिलसिला चल निकला।
चार दशक से ज्यादा समय पहले, पटकथा लेखक सलीम जावेद की जोड़ी ने ‘दीवार’ जैसी फिल्मों के जरिये हिंदी फिल्मों में डॉन या गिरोह के सरगना के जीवन को जिस तरह महिमा मंडित किया है, उससे फिल्म निर्माता बॉक्स ऑफिस पर इस थीम के सफल होने के प्रति आश्वस्त हो गए और ऐसी फिल्में बहुतायत से बनने लगीं। या यूं भी कहा जा सकता है कि एक तरह से गैंगस्टर फिल्मों बॉक्स ऑफिस पर सफलता की गारंटी हो गईं। कला तो कला है। वह हमेशा जिंदगी की नकल करती है।
अंडरवर्ल्ड जब समाज का एक अभिन्न अंग हो गया, तो उसका प्रतिबिंब फिल्मों में भी झलकने लगा। जिस फिल्म ने अमिताभ बच्चन को महानायक बनाया, उसी का उदाहरण लें। ‘दीवार’ फिल्म में अमिताभ बच्चन का किरदार सत्तर के दशक में पनपे माफिया डॉन हाजी मिर्जा मस्तान से प्रेरित है। वह शुरू में मुम्बई की गोदी पर कुली का काम करता था और वहां से उठकर सोने चांदी की तस्करी करने लगा। यह और बात है कि मस्तान का अंत फिल्म के नायक जैसा नहीं हुआ। फिल्मी पंडितों का कहना है कि फिल्मों में अंडरवर्ल्ड के चरित्रों का प्रवेश इसी फिल्म से हुआ। इसके बाद तो यह सिलसिला चल निकला।
daddy
- फोटो : file photo
अर्जुन रामपाल, ‘डैडी’
‘डैडी’ और ‘हसीना पारकर’ इस शृंखला की नवीनतम फिल्में थीं। दोनों 2017 में रिलीज हुईं। ‘डैडी’ मुंबई के डॉन और दगड़ी चाल के बादशाह अरुण गवली पर बनी है। एक बार फिर दर्शकों ने एक ‘गैंगस्टर’ को देखा, जो बाद में राजनीति में आया और मुंबई के चिंचपोकली इलाके से विधायक भी चुना गया। हालांकि, यह एक अलग मुद्दा है वास्तविक जीवन में अरुण गवली कहीं से कहीं तक भी गैंगस्टर नहीं लगता।
अर्जुन रामपाल ने उसका किरदार बखूबी निभाया है। केंद्रीय मुंबई के ऊबड़-खाबड़ रास्तों और छोटी-छोटी गलियों से शुरू होती है अरूण गवली की दास्तान, जो अपनी तकदीर खुद लिखता हुआ भारत का सर्वाधिक खतरनाक गैंगस्टर बन जाता है। कामगार वर्ग के अपने आस-पास के लिए वह एक आधुनिक रॉबिनहुड है। उसका और एक पुलिस इंस्पेक्टर का संघर्ष उसे चार दशकों में कहां से कहां ले जाता है, यह इस फिल्म में बखूबी दर्शाया गया है।
‘डैडी’ और ‘हसीना पारकर’ इस शृंखला की नवीनतम फिल्में थीं। दोनों 2017 में रिलीज हुईं। ‘डैडी’ मुंबई के डॉन और दगड़ी चाल के बादशाह अरुण गवली पर बनी है। एक बार फिर दर्शकों ने एक ‘गैंगस्टर’ को देखा, जो बाद में राजनीति में आया और मुंबई के चिंचपोकली इलाके से विधायक भी चुना गया। हालांकि, यह एक अलग मुद्दा है वास्तविक जीवन में अरुण गवली कहीं से कहीं तक भी गैंगस्टर नहीं लगता।
अर्जुन रामपाल ने उसका किरदार बखूबी निभाया है। केंद्रीय मुंबई के ऊबड़-खाबड़ रास्तों और छोटी-छोटी गलियों से शुरू होती है अरूण गवली की दास्तान, जो अपनी तकदीर खुद लिखता हुआ भारत का सर्वाधिक खतरनाक गैंगस्टर बन जाता है। कामगार वर्ग के अपने आस-पास के लिए वह एक आधुनिक रॉबिनहुड है। उसका और एक पुलिस इंस्पेक्टर का संघर्ष उसे चार दशकों में कहां से कहां ले जाता है, यह इस फिल्म में बखूबी दर्शाया गया है।
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- फोटो : file photo
श्रद्धा कपूर, ‘हसीना पारकर’
दूसरी ओर ‘हसीना पारकर’ दाऊद इब्राहिम की बड़ी बहन हसीना पारकर के जीवन पर आधारित है, जो दाऊद की गैर मौजूदगी में लोगों के संपत्ति से संबंधित झगड़े निपटाया करती है। 2007 में हसीना पारकर के खिलाफ एक गिरफ्तारी वारंट जारी होता है, जिसके बाद वह गायब हो जाती है। सुनवाई के दिन वह कोर्ट में आत्मसमर्पण कर देती है। हसीना पर एक बिल्डर से पैसा ऐंठने और दुबई में जा बसे अपने भाई के अवैध व्यापार की देखभाल करने का आरोप है, जिससे वह इनकार करती है। चूंकि कोई गवाह सामने नहीं आता, इसलिए जज उसे जमानत दे देता है।
श्रद्धा कपूर ने हसीना के चरित्र को पर्दे पर जिया और काफी हद तक अपनी भूमिका के साथ न्याय करने में सफल रहीं। मजेदार बात तो यह है कि हसीना के पति इब्राहिम पारकर की हत्या अरुण गवली गैंग के लोगों ने की थी। उन्होंने अरुण गवली के बड़े भाई पापा गवली की हत्या का बदला लिया था। यह भी एक संयोग ही है कि ये दोनों फिल्में एक ही साल कुछ समयांतर से रिलीज हुईं।
दूसरी ओर ‘हसीना पारकर’ दाऊद इब्राहिम की बड़ी बहन हसीना पारकर के जीवन पर आधारित है, जो दाऊद की गैर मौजूदगी में लोगों के संपत्ति से संबंधित झगड़े निपटाया करती है। 2007 में हसीना पारकर के खिलाफ एक गिरफ्तारी वारंट जारी होता है, जिसके बाद वह गायब हो जाती है। सुनवाई के दिन वह कोर्ट में आत्मसमर्पण कर देती है। हसीना पर एक बिल्डर से पैसा ऐंठने और दुबई में जा बसे अपने भाई के अवैध व्यापार की देखभाल करने का आरोप है, जिससे वह इनकार करती है। चूंकि कोई गवाह सामने नहीं आता, इसलिए जज उसे जमानत दे देता है।
श्रद्धा कपूर ने हसीना के चरित्र को पर्दे पर जिया और काफी हद तक अपनी भूमिका के साथ न्याय करने में सफल रहीं। मजेदार बात तो यह है कि हसीना के पति इब्राहिम पारकर की हत्या अरुण गवली गैंग के लोगों ने की थी। उन्होंने अरुण गवली के बड़े भाई पापा गवली की हत्या का बदला लिया था। यह भी एक संयोग ही है कि ये दोनों फिल्में एक ही साल कुछ समयांतर से रिलीज हुईं।
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dayavan
- फोटो : social media
फिरोज खान, ‘दयावान’
अगर हाजी मस्तान किसी चरित्र की प्रेरणा हो सकता था, तो मुंबई पर दो दशक यानी 1960 से 1980 तक राज करने वाला वरदराजन मुदलियार क्यों नहीं होता। फिरोज खान की ‘दयावान’ के नायक का चरित्र पूरी तरह वरदराजन मुदलियार के चरित्र पर आधारित था। मुदलियार का मुख्या धंधा अवैध शराब का था, जिसकी कई भट्टियां उन दिनों मुंबई के उपनगरों में हुआ करती थीं।
लेकिन इस फिल्म में उसे तस्करी करते दिखाया गया है। इस फिल्म में गॉडफादर का भी पुट है। लोग अपने-अपने मसले और समस्याएं लेकर नायक के पास आते हैं, जिनका वह फैसला करता है। वह गरीब लोगों का मसीहा भी है, जो हर तरह से उनकी मदद करता है। बाद में 1983 में बनी ‘अर्ध सत्य’ के खलनायक रामा शेट्टी के चरित्र में भी वरदराजन मुदलियार का समावेश किया गया था। बाद में विधु विनोद चोपड़ा की ‘परिंदा’ में नाना पाटेकर द्वारा अभिनीत अन्ना का किरदार भी मुदलियार से ही प्रेरित बताया जाता है।
अगर हाजी मस्तान किसी चरित्र की प्रेरणा हो सकता था, तो मुंबई पर दो दशक यानी 1960 से 1980 तक राज करने वाला वरदराजन मुदलियार क्यों नहीं होता। फिरोज खान की ‘दयावान’ के नायक का चरित्र पूरी तरह वरदराजन मुदलियार के चरित्र पर आधारित था। मुदलियार का मुख्या धंधा अवैध शराब का था, जिसकी कई भट्टियां उन दिनों मुंबई के उपनगरों में हुआ करती थीं।
लेकिन इस फिल्म में उसे तस्करी करते दिखाया गया है। इस फिल्म में गॉडफादर का भी पुट है। लोग अपने-अपने मसले और समस्याएं लेकर नायक के पास आते हैं, जिनका वह फैसला करता है। वह गरीब लोगों का मसीहा भी है, जो हर तरह से उनकी मदद करता है। बाद में 1983 में बनी ‘अर्ध सत्य’ के खलनायक रामा शेट्टी के चरित्र में भी वरदराजन मुदलियार का समावेश किया गया था। बाद में विधु विनोद चोपड़ा की ‘परिंदा’ में नाना पाटेकर द्वारा अभिनीत अन्ना का किरदार भी मुदलियार से ही प्रेरित बताया जाता है।