हिंदी सिनेमा के गीतकार आनंद बख्शी बॉलीवुड में उस दौर के बेजोड़ लिरिसिस्ट में से एक थे। उन्होंने बॉलीवुड में सात दशक तक करीब 4000 गाने लिखे थे। आनंद बख्शी में एक खास कला थी कि अगर वह सिचुएशन को अच्छे से समझ लें तो वह 8-10 मिनट में ही गाने लिख दिया करते थे। 21 जुलाई 1930 को रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) के एक ब्राह्मण परिवार में जन्में बख्शी की आज 90वीं बर्थ एनिवर्सरी है। यूं तो एक गीतकार के तौर पर आनंद बख्शी साहब ने इतने ढेर सारे गाने सुपरहिट गाने लिखे हैं कि उनका जिक्र एक बार में किया जाना नामुमकिन है, लेकिन आज हम आपको उनकी कलम से निकले और सदियों तक सुने जाने वाले कुछ गीतों के बारे में बताने जा रहे हैं।
Anand Bakshi Birth Anniversary: जिस आवाज का मुरीद था पूरा देश, सुनिए उनके लिखे कुछ सदाबहार नगमे
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दो लफ्जों की है
1979 की फिल्म 'द ग्रेट गैंबलर' का गाना 'दो लफ्जों की है' को फिल्म के मुख्य अभिनेता अमिताभ बच्चन ने आशा भोंसले और शरद कुमार के सहयोग से गाया था। इस गाने को आनंद बक्शी साहब ने लिखा है। अपनी रिलीज के लगभग 5 दशक बाद भीये गाना सदाबहार गीतों में से एक है।
अच्छा तो हम चलते हैं
ये गाना सुपरस्टार राजेश खन्ना और आशा पारेख की फिल्म 'आन मिलो सजना' का है। गाने में दोनों की सिजलिंग केमिस्ट्री दिखाई गई है। ये एक रोमांटिक गाना है। जिसे किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने अपनी आवाज में गाया है। ये गाना दो प्रेमियों के बीच एक खट्टी-मीठी केमिस्ट्री को दर्शाता है।
प्यार दीवाना होता है
संगीत उस्ताद आरडी बर्मन के म्यूजिक पर 'प्यार दीवाना होता है' को किशोर कुमार ने गाया है। आनंद बख्शी का यह रोमांटिक गाना 1971 की क्लासिक हिंदी फिल्म 'कटी पतंग' का है।
ये शाम मस्तानी
'ये शाम मस्तानी' भी फिल्म 'कटी पतंग' का सदाबहार गाना है। इस गाने को भी किशोर कुमार ने अपनी खूबसूरत आवाज में गाया है। आज भी ये गाना लोगों द्वारा खूब पसंद किया जाता है।