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Anup Jalota Interview: सात साल की उम्र में पहली बार पुलिस लाइन में गाया, इस्कॉन में गाए भजनों का बना अलबम

Fri, 28 Jul 2023 01:06 PM IST
Virendra Mishra वीरेंद्र मिश्र
Updated Fri, 28 Jul 2023 01:06 PM IST
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Anup Jalota Exclusive Interview his birthday lata Mangeshkar Kishore kumar Mukesh mohd rafi
अनूप जलोटा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
29 जुलाई 1953 को जन्मे भजन सम्राट अनूप जलोटा आज अपना 70वां जन्मदिन मना रहे हैं। अनूप जलोटा ने भजन गायन को ऐसे समय में चुना जब मुकेश, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार जैसे गायकों के प्रभावित होकर लोग इनके जैसा गायक बनना चाह रहे थे। अनूप जलोटा के मुताबिक, उन्होंने भजन गायकी को इसलिए चुना क्योंकि यह अध्यात्म से जुड़ा है। वह कहते हैं, जब गायन की विधा अध्यात्म से जुड़ती है तो उसका स्थान प्रथम हो जाता है। अनूप जलोटा ने फिल्मों में कुछ रोमांटिक गाने भी गाए हैं, लेकिन उनका झुकाव भजन और गजल गायकी की तरफ ही रहा है। अपने जन्मदिन पर अनूप जलोटा ने ‘अमर उजाला’ से ये खास बातचीत की। 
Anup Jalota Exclusive Interview his birthday lata Mangeshkar Kishore kumar Mukesh mohd rafi
अनूप जलोटा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

जिस दौर में सारे गायक मुकेश, मोहम्मद रफी और किशोर कुमार जैसा बनना चाह रहे थे, आपका झुकाव भजनों की तरफ कैसे हो गया?  

मेरे पिता पुरुषोत्तम दास जलोटा जब मुझे संगीत सिखाते थे तो कहते थे कि गायन विधा को सबसे प्रमुख विधा माना गया है। गायन, वादन, नृत्य में गायन को प्रमुख माना गया है, नृत्य को द्वितीय और नृत्य को तृतीय। गायन में भी अगर आध्यात्मिक गायन हो, तो वह और भी प्रथम हो जाता उसमें हम अध्यात्म की बात करते हैं। पिताजी ने मुझे सबसे पहला गीत 'ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैजनिया' सिखाया था। सात साल की आयु में मुझे स्टेज पर बैठा दिया, तभी से हम गाने  लगे और अभी तक गा रहे हैं। सात साल से 70 वर्ष की यह जो यात्रा है, अभी तक चल रही है। 

Anup Jalota Exclusive Interview his birthday lata Mangeshkar Kishore kumar Mukesh mohd rafi
अनूप जलोटा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सात साल की उम्र में कहां बैठे पहली बार स्टेज पर?

पहली बार स्टेज पर लखनऊ में जन्माष्टमी के दिन पुलिस लाइन में गाया था। हर साल पुलिस लाइन में पुलिस वाले जन्माष्टमी बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। मानते हैं कृष्ण हमारे जेल में पैदा हुए थे। हमेशा जेल और पुलिस स्टेशन में बहुत भव्य तरीके से जन्माष्टमी मनाते हैं। पिता जी छह वर्ष की उम्र से संगीत सिखा ही रहे थे और मंच पर गाने से यह सीखने को मिला कि दर्शकों को दोस्त कैसे बनाते हैं। 

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Anup Jalota Exclusive Interview his birthday lata Mangeshkar Kishore kumar Mukesh mohd rafi
अनूप जलोटा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

पिताजी के अलावा और किन भजन गायकों का प्रभाव आपके जीवन में रहा है?

पंडित जसराज, भीमसेन जोशी जी, ओमकार नाथ ठाकुर, हरिओम शरण जैसे भजन गायकों का मेरे जीवन पर काफी प्रभाव रहा है। इन सबके भजन मुझे बहुत भाते हैं। उनकी गायकी का जो  स्टाइल है। उसे कहीं न कहीं अपनी गायकी में उतरता हूं। हरिओम शरण का गाया भजन 'मैली चादर ओढ़कर' मेरा बहुत ही पसंदीदा भजन है, इस भजन को अक्सर स्टेज कार्यक्रम के दौरान गाता रहता हूं। 

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Anup Jalota Exclusive Interview his birthday lata Mangeshkar Kishore kumar Mukesh mohd rafi
जगजीत सिंह, अनूप जलोटा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

और, रेडियो पर कैसे शुरुआत हुई? मैं लखनऊ से मुंबई 20 वर्ष की उम्र में आ गया। मेरे पिता जी मुझसे दो साल पहले आए थे। ऑल इंडिया रेडियो में एक ग्रुप था जहां  मुझे 320 रुपये महीने की नौकरी मिल गई। मैने दो वर्ष तक नौकरी की। ऑल इंडिया रेडियो में एक ग्रुप था जिसमें  30 गायक थे। उनमें से एक मैं भी था। उषा मंगेशकर जी, महेंद्र कपूर जी के अलावा और भी कई गायक आते थे। उनके लिए हम कोरस में गाते रहे। फिर धीरे- धीरे हमारे गाने की महक लोगों तक बाहर पहुंची, लोगों को अच्छा लगा। मनोज कुमार जी ने 'शिरडी के साईं बाबा' फिल्म में पहली बार मोहम्मद रफी साहब के साथ गाने का मौका दिया। 'एक दूजे के लिए' में दो पंक्तियां गाई, इस तरह से हमारे गानों की चर्चा होने लगी। और, अभी तक सफर चल रहा है।

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