बॉलीवुड में वैसे तो हर जमाने में कई स्टार और सुपरस्टार रहे हैं, लेकिन कुछ अभिनेता स्टारडम की जगह गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करते हैं। ये खुद की पहचान अभिनय कौशल से करवाना ज्यादा पसंद करते हैं। इनमें से एक हैं अनुपम खेर, जिन्हें दुनिया एक नहीं दो नहीं बल्कि 500 किरदारों में देख चुकी है। ये तो रही फिल्मी किरदारों की बात। लेकिन अगर असल जिंदगी पर नजर डालें तो मुख्यता ये दो भूमिकाओं में दिखाई पड़ेंगे। पहला कि सैकड़ों मूवीज में तराशा हुआ आला किरदार निभाने वाला अभिनेता तो दूसरा राजनीतिक मुद्दों पर मुखर रहने वाला शख्स। वैसे अनुपम खेर के बारे में आप सभी बहुत कुछ जानते होंगे। लेकिन आज उन बातों से वाकिफ करवाएंगे, जिनसे शायद आप अब तक अनजान हों।
अनुपम खेर: जब अभिनेता ने महेश भट्ट को दे दिया था श्राप और रिपोर्टर को थप्पड़, जानिए क्या था मामला
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7 मार्च 1955 में शिमला में जन्में 66 वर्षीय अभिनेता ने ये सफलता, ये अवार्ड्स, ये नाम और शोहरत ऐसे ही हासिल नहीं की। बल्कि इसके पीछे लगी हैं कई सारी असफलताओं की चोट, जिंदगी की कश्मकश और मुद्दत की मेहनत। इसकी शुरुआत आज नहीं बल्कि सालों पहले तब हुई थी जब वह स्कूल में नौवीं कक्षा के एक छात्र थे। तब अनुपम को अपने भविष्य का कोई इल्म न था। वे सिनेमा और फिल्मी दुनिया से अबोध तो थे ही इन सब मामलों में थोड़े कच्चे भी थे।
अनुपम खेर के पिता का नाम पुष्कर नाथ खेर और मां का नाम दुलारी खेर है। उनके एक भाई भी हैं राजू खेर, जो उनके सोशल मीडिया पर डाले गए वीडियोज कभी-कभार नजर भी आते हैं और हूबहू उन्हीं की तरह दिखते हैं। चलिए, वापस फिर अनुपम के स्कूल के दौर में चलते हैं। तो यहां जब अनुपम खेर नौवीं कक्षा के विद्यार्थी थे तो स्कूल में एक ड्रामा करने का मौका मिला। लेकिन मुसीबत ये आ पड़ी कि उन्हें डायलॉग ही याद नहीं हो रहा था। बस इस कारण वह रोल उनकी झोली से निकलकर किसी और के पास चला गया। हालांकि, तब अनुपम को इस बात का अंदाजा नहीं था कि नियति उन्हें कहां ले जाने वाली है।
सालों बाद जब उन्होंने फिल्मों में कदम रखा तो घोर संघर्षों का दौर देखा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानीं। क्योंकि उन्हें अपने दादा की दी गई एक नसीहत याद आ गई कि ‘एक आदमी जो पहले से ही पानी में भीग चुका है, उसे बारिश से नहीं डरना चाहिए’। बस इसी बात ने उन्हें हिम्मत बंधाई। कहते हैं कि अनुपम कामयाबी न मिलने से निराश होकर मुंबई से रवानगी की तैयारी कर चुके थे। लेकिन इस एक बात ने उन्हें वहीं जमे रहने की हिम्मत दी और वो रुक गए।
मुंबई में रुकना अनुपम खेर के लिए लाभदायक साबित हुआ। सब्र से काम लेने पर उन्हें सफलता महेश भट्ट की फिल्म ‘सारांश’ में काम पाकर मिली। यह फिल्म 25 मई 1984 में रिलीज हुई थी। वैसे तो उन्होंने 1982 में फिल्म आगमन से बॉलीवुड में डेब्यू किया था, लेकिन पहचान फिल्म सारांश से ही मिली थी। इसके बाद उनका सफलता रथ दौड़ पड़ा और खेर ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक फिल्मों में उम्दा प्रदर्शन किए।